होली के पर्व पर भगवान श्रीरामराजा सरकार चौक में विराजमान होंगे। एक मार्च को होलिका दहन के बाद शुक्रवार 2 मार्च को भगवान गर्भगृह से बाहर चौक में आएंगे और यहीं पर लोगों को दर्शन देंगे। दो दिन तक चौक में विराजमान रहने के बाद सरकार 4 मार्च को फाल्गुन तीज पर भगवान दालान में आकर होली खेलेंगे।
विवेक कुमार गुप्ता.ओरछा.होली के पर्व पर भगवान श्रीरामराजा सरकार चौक में विराजमान होंगे। एक मार्च को होलिका दहन के बाद शुक्रवार 2 मार्च को भगवान गर्भगृह से बाहर चौक में आएंगे और यहीं पर लोगों को दर्शन देंगे। दो दिन तक चौक में विराजमान रहने के बाद सरकार 4 मार्च को फाल्गुन तीज पर भगवान दालान में आकर होली खेलेंगे। इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है। जबकि 5 मार्च की सुबह मंगला आरती होगी। पुरातन परंपरा के अनुरूप श्रीरामराजा सरकार होली के पर्व पर चौक में विराजमान होंगे।मंदिर के आचार्य वीरेंद्र बिदुआ बताते हैं कि 1 मार्च को मंदिर के प्रमुख पुजारी एवं परचारी चौक में होलिका दहन करेंगे। इसके बाद श्रीरामराजा सरकार 2 मार्च को चौक में विराजमान होगें और यही पर उनकी आरती पूजा की जाएगी। इसके बाद होली खेलने के लिए भगवान को 4 मार्च को चौक से लगे दालान में लाया जाएगा। जहां देर रात से भगवान के द्वारा भक्तों के साथ होली खेली जाएगी। भगवान के दालान में आने पर श्रद्धालु मंदिर के आंगन से ही भगवान के दर्शन कर उन्हें रंग-गुलाल अर्पित करेंगे।
अनुमति लेकर आएंगे बाहर: भगवान को गर्भगृह से बाहर लाने के लिए मंदिर के प्रमुख पुजारी उनकी विधिविधान से पूजा कर मंत्रोच्चार के साथ स्तुतिपाठ करेंगे। इसके बाद भगवान श्रीरामराजा से अनुमति लेकर उन्हें बाहर लाया जाएगा। भगवान को गर्भगृह से बाहर लाने के लिए मात्र पुजारी एवं मंदिर के परचारी ही गर्भगृह में जाएंगे। यही लोग भगवान को लेकर चौक में आते है। इनके अतिरिक्त किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नही होती है।
वनवासी राम से होगी फाग की शुरूवात: श्रीरामराजा मंदिर में परंपरा के अनुरूप मुख्यमंदिर के बाजू से लगी दालान में विराजे वनवासी राम के मंदिर से फाग की शुरूवात होगी। यहां पर सुबह 8 बजे होली उत्सव प्रारंभ होगा। इसके साथ रामसभा में फागों का गायन किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से आए लोकगीत मंडलियां भगवान को फाग गाकर सुनाएंगी। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीरामराजा सरकार के साथ होली खेलेंगे। पुजारी प्राचीन चांदी की पिचकारियों से पहले भगवान ,फिर संत्री,प्रबंधक और उसके बाद विशेष फूलों से बनाएं गए रंग की बारिश श्रद्धालुओं करेंगे। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। वहीं रात्रि के समय मंदिर के बाद श्रद्धालुओं को ब्यारी का प्रयाद वितरण किया जाएगा।