टीकमगढ़

साफ्टवेयर इंजीनियर ने पाले  कड़कनाथ

टीकमगढ़ में पहली बार किया ५०० चूजों से कड़कनाथ पालन

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Sep 24, 2019
kadaknath ka ho raha palan
kadaknath ka ho raha palan

टीकमगढ़ .अब टीकमगढ़ में भी कड़कनाथ मुर्गे का पालन शुरू हो गया है। स्वाद के लिए ही नहीं स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण कड़कनाथ मुर्गे का पालन किसी किसान ने नहीं, बल्कि साफ्टवेयर इंजीनियर ने शुरू की है। फिलहाल, 500 चूजों के साथ शुरू किए गए इस पोल्ट्री फार्म में आशा के अनरूप कड़कनाथ का विकास हो रहा है। इसी वर्ष जुलाई में इन चूजों की पहली खेप लाई गई थी जो अब बढ़ कर करीब 700 ग्राम तक हो गया है।

शहर के बस स्टैंड के निकट देवकीनंदन कॉलोनी में से सटे अपनी पुश्तैनी जमीन के एक हिस्से में 29 वर्षीय नरेन्द्र यादव कड़कनाथ का पालन शुरू किया है। नरेन्द्र ने टीकमगढ़ से ही वर्ष 2011 में बीसीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रह कर वर्ष 2014 तक परीक्षा की तैयारी की। इसके बाद गुडग़ांव व दिल्ली सहित कई अन्य शहरों में साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर नौकरी की।

इसी दौरान अपना कुछ करने का विचार आया तो कड़कनाथ पालन करने का मानस बना लिया। टीकमगढ़ लौटकर कड़कनाथ के लिए शेड पर करीब ढाई लाख रुपए खर्च किए। इसके बाद खजुराहो से कड़कनाथ मुर्गे के चूजे मंगवाए। खजुराहो से प्रति चूजा 90 रुपए का पड़ा। अब दूसरी खेप में जबलपुर से मंगवाने की सोच रहे हैं। क्योंकि वहां से मंगवाने पर काफी सस्ता पड़ेगा।

नरेन्द्र यादव ने बताया कि शुरुआत में कुछ सामान्य सी परेशानी हुई, लेकिन अब सब कुछ ठीक-ठाक है। कड़कनाथ ग्रोथ अच्छा कर रहा है। अक्टूबर तक पहली खेप लगभग तैयार हो जाएगी। उनके इस कार्य में वीएएस डॉ. आरके जैन काफी सहयोग कर उन्हें प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कड़कनाथ का आहार जतारा से मंगवा जा रहा है। आहार उत्पादक से कह कर कड़कनाथ के आहार में कुछ अन्य तत्व एड किया गया है वहीं कुछ केमिकल्स को आहार से हटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि शुरू में करीब आधा दर्जन मुर्गे मर गए, लेकिन अब अच्छा विकास कर रहा है और सभी कड़कनाथ स्वस्थ और बेहतर है। सब कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर तक कड़कनाथ मुर्गे का औसत वजन एक किलोग्राम से अधिक हो जाएगा।

यह है विशेषता
दरअसल, कड़कनाथ मुर्गा जंगली नस्ल का मुर्गा है। इसके पंख, कलगी, पंजा व मीट बिल्कुल काला होता है। इस कारण इसे कालीमासी भी कहा जाता है। मध्यप्रदेश के झाबुआ और धार से इस नस्ल की शुरुआत हुई है। कड़कनाथ में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है वहीं वसा और कोलेस्ट्रोल नाममात्र होता है।

इसी तरह इसमें विटामिन्स, कैल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन भरपूर मात्रा में मिलता है। बताया जाता है कि यह दिल व डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहतरीन दवा का काम करता है। इतना ही नहीं जानकारों का कहना है कड़कनाथ का मांस करीब 80 प्रकार की बीमारियों में दवा के रूप में काम आता है।

देखना पड़ेगा बाजार
नरेन्द्र यादव ने बताया कि टीकमगढ़ में यह पहला प्रयोग है। ऐसे में बाजार को देखना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि भोपाल, इंदौर व दिल्ली में इसकी बेहद मांग है। सर्दी के दिनों में माग बढऩे से दाम भी भरपूर मिलता है।

Published on:
24 Sept 2019 12:13 pm