टीकमगढ़

बंजर और ककरीली जमीन को बनाया हरियालीदार

मगरा गांव में करन ने लगाए थे पौध

3 min read
Jun 04, 2024
मगरा गांव में करन ने लगाए थे पौध

पहले था मैदान में अब बन गया जंगल

टीकमगढ़.प्रदूषण को लेकर जहां ज्यादातर लोग सिर्फ चिंता जताने तक ही सीमित हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बड़ी खामोशी से प्रकृति को नव जीवन देने में लगे हैं। ऐसे ही लोगों में से एक हैं मगरा गांव के करन सिंह और पिता बैजनाथ लोधी। इन दोनों से अपने जज्बे से ककरीली और बंजर भूमि में हरियाली फैली दी। अब तक यहां पर छह साल में ७०० से अधिक पौधे लगा चुके हैं।
किसान करन सिंह का कहना था कि पहाडी क्षेत्र की बंजर और ककरीली भूमि होने से रबी सीजन की फसलों को उगाना सिर्फ मन बहलाने जैसा था। पहाड़ी होने से इस पर खेती करना काफी मुश्किल था। छह साल में इस बंजर जमीन में हरियाली बिखेर दी और मैदान को बगीचा का रूप दे दिया। आज इन पेडों से फ ल भी मिलना शुरू हो गया हैं। साल के 365 दिनों में हर रोज 12 घंटों की सेवा पर्यावरण संवारने के लिए करते हैं।
किसान बैजनाथ सिंह लोधी बताते है कि बंजर पड़ी जमीन पर कोई भी फसल नहीं उगा पाते थे। बोने के बाद उसका आकार छोटा ही रहता था। डूडा गांव निवासी मनोहर सिंह लोधी ने बंजर जमीन में पर्यावरण संरक्षण पौधें रौपने की प्रेरणा दी। छह साल में ७०० से अधिक कई प्रकार के पेड़ों की संख्या हो गई हैं। जिसमें सबसे अधिक अमरूद, नीबू, कटहल, सागौन, नीम के साथ अन्य पौधे पेड़ बन गए हैं। पिछले पानी खत्म हो गया था, जिससे पेड़ सूखने लगे थे, बालिटयों में पानी भरकर पौधों को सींचा, उसके बाद आज यह बंजर जमीन हरियालीदार दिखाई दे रही हैं। पहले मैदान दिखाई देता था, आज जंगल की तरह दिखाई दे रहा हैं। अब सिंचाई के लिए बोर का खनन करवा लिया हैं।

उनका एक ही लक्ष्य हैं पौधों की सिंचाई कर पेड़ बनाना और पुत्र की तरह देखभाल करना। इनकी इस पौधों के लिए त्याग, समर्पण और सेवा को देखकर ग्रामीण व अन्य लोग तारीफ करने से नहीं थकते। डूडा निवासी मनोहर सिंह बताते हैं कि बगीचे में आज आम, आंवला, कटहल सहित करीब ७00 से अधिक पौधे व पेड़ हैं। अब तो आम और अमरूद के पेड़ ने फ ल देना शुरू कर दिया है। अपनी कडी मेहनत से उन्होंने बंजर और ककरीली जमीन पर भी पौधों से पेड बनाकर बंजर जमीन पर हरियाली बिखेर दी है। उन्होंने बताया कि परिवार और बगीचा उनके लिए दोनों समान है।


किसान बैजनाथ सिंह लोधी बताते है कि बंजर पड़ी जमीन पर कोई भी फसल नहीं उगा पाते थे। बोने के बाद उसका आकार छोटा ही रहता था। डूडा गांव निवासी मनोहर सिंह लोधी ने बंजर जमीन में पर्यावरण संरक्षण पौधें रौपने की प्रेरणा दी। छह साल में ७०० से अधिक कई प्रकार के पेड़ों की संख्या हो गई हैं। जिसमें सबसे अधिक अमरूद, नीबू, कटहल, सागौन, नीम के साथ अन्य पौधे पेड़ बन गए हैं। पिछले पानी खत्म हो गया था, जिससे पेड़ सूखने लगे थे, बालिटयों में पानी भरकर पौधों को सींचा, उसके बाद आज यह बंजर जमीन हरियालीदार दिखाई दे रही हैं। पहले मैदान दिखाई देता था, आज जंगल की तरह दिखाई दे रहा हैं। अब सिंचाई के लिए बोर का खनन करवा लिया हैं।

बाल्टी से पहुंचाया पानी
गांव के पास डेढ एकड़ से अधिक जमीन ककरीली और बंजर थी। जहां पौधरोपण तो हुआ हं, लेकिन सिंचाई का कोई साधन नहीं था। पौधरोपण के बाद बाल्टी से सिंचाई की। अब ट्यूब बैल के पंप नहीं है। मैदान से कुछ दूर तेजराम साहू के मोटर पंप से बाल्टी पर पानी लाकर सिंचाई किया है। आज भी यहां मोटर पंप नहीं है। इसके बाद भी 15 सालों तक बाल्टी से पानी लेकर पौधों को पेड बना दिया।

Published on:
04 Jun 2024 08:06 pm
Also Read
View All

अगली खबर