किले में बिहारी जू मंदिर के दर्जन करने जाते है श्रद्धालु, संरक्षित को लेकर उठी मांग
टीकमगढ़ लिधौरा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत सतगुवा में स्थित बुंदेला कालीन ऐतिहासिक राजाशाही हवेली रखरखाव के अभाव में धीरे धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है। ग्रामीण इस हवेली को किला भी कहते है। गांव वासियों ने जिला प्रशासन से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और रखरखाव की मांग की है, ताकि गांव की पहचान और विरासत सुरक्षित रह सके।
ग्रामीणों का कहना कि बुंदेलखंड अंचल में चंदेल और बुंदेला शासकों के समय की कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी मौजूद है, लेकिन उपेक्षा के चलते वे अपनी पहचान खोती जा रही है। सतगुवा की यह हवेली भी उसी उपेक्षा का शिकार है, जो कभी राजाओं के वैभव और स्थापत्य कला की पहचान हुआ करती थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि सतगुवा की राजाशाही हवेली बुंदेलखंड की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है। समय रहते यदि इसका संरक्षण और रखरखाव किया गया, तो यह आने वाली पीढियों के लिए इतिहासए संस्कृति और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस हवेली में लगभग 30 वर्षों तक विद्यालय का संचालन किया गया। वर्ष 2022 तक स्कूल चलने के कारण भवन का नियमित रखरखाव होता रहा, लेकिन विद्यालय बंद होने के बाद भवन खाली हो गया। इसके बाद प्रशासनिक उपेक्षा के चलते हवेली की स्थिति लगातार जर्जर होती चली गई।
सतगुवा की यह हवेली टीकमगढ़ जिले के जतारा क्षेत्र में स्थित है और बुंदेला क्षत्रिय शासकों द्वारा निर्मित मानी जाती है। यह हवेली बुंदेला स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिसमें सुंदर झरोखे, जटिल नक्काशी और भव्य बनावट आज भी देखी जा सकती है। यह इमारत बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास और शाही वैभव की गवाह है।
धार्मिक आस्था का केंद्र भी हवेली परिसर में प्रसिद्ध बिहार झुका मंदिर भी स्थित है। जहां दर्शन के लिए सतगुवा सहित आसपास के गांव बिजरोठा, फ तेहका खिरक, गोटेट और मुहारा के ग्रामीण आज भी नियमित रूप से आते है। इससे यह स्थल ऐतिहासिक के साथ साथ धार्मिक महत्व भी रखता है।
सतगुवा गांव की यह ऐतिहासिक राजाशाही हवेली शासकीय भवन है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी जाएगी और शासन स्तर पर चर्चा कर इसे पुरातत्व विभाग में शामिल कराने की प्रक्रिया की जाएगी। जिससे इसका समुचित संरक्षण हो सके।
यह सैकड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक हवेली है, जिसके संरक्षण की मांग लंबे समय से की जा रही है। यदि शासन स्तर से यह भवन ग्राम पंचायत को हैंडओवर किया जाता है, तो पंचायत अपने स्तर पर भी इसके रखरखाव की व्यवस्था कर सकती है।