भले ही यह एक प्रेमकथा न हो लेकिन पिछड़े समाज को आईना दिखाती है
विवेक कुमार गुप्ता @ टीकमगढ़. ये कहानी अक्षयकुमार व भूमि पेडनेकर अभिनीत फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेम कथा से खूब मिलती है। वह यूपी के एक गांव की कहानी है तो यह बुंदेलखंड के अमरपुर की हकीकत। भले ही यह एक 'प्रेमकथा न हो लेकिन पिछड़े समाज को आईना दिखाती है। रामवती के शौचालय की कहानी जब कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल को पता चली तो उन्होंने कहा वे रामवती को जिले में स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर बनाएंगे।
ग्राम पंचायत अमरपुर की एक पढ़ी-लिखी बहू रामवती अहिरवार की शौचालय की जिद के आगे आखिर परिवार ने समर्पण करते हुए उसका सपना आखिरकार पूरा कर ही दिया। रामवती का जज्बा देख गांव ने वालों ने भी शौचालय निर्माण में श्रमदान किया। रामवती की इच्छाशक्ति सभी के लिए मिसाल बन गई है। रामवती की लगन को देखते हुए पड़ोस की महिलाओं ने भी अपने घरों में जिद की, जिसके चलते अब बाबू अहिरवार, चैनू, खडिय़ां और कालीचरण के परिवार की महिलाओं ने शौचालय का निर्माण शुरू कर दिया है।
प्रेरक टीम ने परिजनों को दी समझाइश
रामवती ने जब सास कांटीबाई से शर्मिंदगी की बात कही तो उन्होंने रुपए न होने की दुहाई देकर बात टाल दी। पति ने भी न सुनी। मान-मनौव्वल में ही एक साल बीत गया, लेकिन रामवती ने हिम्मत नहीं हारी। इसी बीच उसे एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में जाने का अवसर मिला, जहां शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। रामवती ने अपने परिवार को शौचालय बनाने की समझाइश देने के लिए मदद मांगी। इसके बाद प्रेरक टीम ने रामवती के घर जाकर सास-ससुर को शौचालय के लिए जागरुक किया, जिससे रामवती को परिवार की सहमति तो मिल गई लेकिन सहयोग नहीं मिला।
देर होते देख खुद ने शुरू किया काम
परिजनों ने कहा कि जब पति दिल्ली से लौटेंगे तब शौचालय बन पाएगा। देरी होते देख रामवती ने खुद ही काम करने का निर्णय लिया पर यह आसान नहीं था। महिला के जज्बे को देख परिजनों संग ग्रामीणों ने भी शौचालय निर्माण में श्रमदान किया और सपना पूरा हो गया।
परिवार की माली हालत है खराब
रामवती का विवाह दबंगों का गांव कहे जाने वाले अमरपुर में हुआ था। तंगी के चलते पति राकेश व भाई दिल्ली में मजदूरी करते हैं। शिक्षित और स्वच्छता के प्रति संवेदनशील रामवती को जब घर में शौचालय न होने के कारण बाहर जाना पड़ता था तो उसे शर्मिंदगी महसूस होती थी।