दो भागों में बंटा है टोंक शहरपुरानी एक हजार साल तो नया टोंक की नींव रखी गई थी 18वीं सदी मेंइतिहास का झरोका.... टोंक. प्रदेश में कम ही ऐसे शहर हैं जो दो भागों में बंटे हुए हैं, लेकिन टोंक शहर दो भागों के साथ एक एक हजार साल पुराना और नया 18वीं सदी का बनाया हुआ है।
ऐसा शहर जिसके दो इतिहास
दो भागों में बंटा है टोंक शहर
पुरानी एक हजार साल तो नया टोंक की नींव रखी गई थी 18वीं सदी में
इतिहास का झरोका....
टोंक. प्रदेश में कम ही ऐसे शहर हैं जो दो भागों में बंटे हुए हैं, लेकिन टोंक शहर दो भागों के साथ एक एक हजार साल पुराना और नया 18वीं सदी का बनाया हुआ है।
दरअसल पुरानी टोंक शहर की स्थापना इतिहास के मुताबिक 9वीं सदी की मानी जाती है। इस पर कई राजाओं ने राज किया। यह शहर कभी कोटा तो कभी जयपुर रियासत के अधीन भी रहा। 14वीं सदी में यह सोलंकी वंश के अधीन हो गया। यह वंश आज भी पुरानी टोंक में निवासरत है।
एक समय में पुरानी टोंक चारदीवारी में था। इसके निशान आज भी क्षतिग्रस्त दीवारों के रूप में है। वहीं कई दरवाजे भी उन दिनों रास्तों के हिसाब से बनाए गए थे। इनमें मेहंदवास गेट, बमोर गेट, मालपुरा गेट, निवाई दरवाजा व पंचकुइया दरवाजा शामिल है।
वहीं दूसरे नए टोंक की स्थापना 1817 में नवाब अमीरुद्दौला उर्फ अमीर खां ने की। 15 नवम्बर 1817 को ईस्ट इण्डिया कम्पनी से नवाब अमीर खां की एक संधि हुई। इसमें वे टोंक रियासत के नवाब बना दिए गए। इस संधि के अनुसार जो रियासत टोंक अस्तित्व में आई, उसका रकबा 553 मुरबा मील था, और आमदनी 56 लाख रुपए मय जागीरात थी। आबादी लगभग चार लाख थी।
उनके वंशजों ने टोंक में कई बेहतरीन इमारते बनाई। नए टोंक में अधिकतर भवन व इमारतें उनके दौर में ही बनवाई गई है। इसमें घंटाघर, इसके समीप परिवार न्यायालय भवन, कलक्ट्रेट, सर्किट हाउस, कोठी नातमाम स्कूल, फ्रेजर पुल, सआदत अस्पताल समेत अन्य भवन शामिल हैं, जो उस दौर में बनाए गए।
आज शहर काफी विकसित हो चुका है। वहीं कई किलोमीटर में फैल चुका है। नगर परिषद के वार्ड भी अब बढ़कर 60 हो गए हैं। शहर की आबादी ही सवा दो लाख के पार हो चुकी है।
शहर का इतिहास और भी कुछ बयां करता है। यहां का इतिहास हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी टोंक में सटीक रूप से दी जाती है। यहां की मीठी भाषा प्रदेश के अन्य जिलों को भाति भी है।