टोंक

नगर परिषद कर रही स्थायी लोक अदालत के निर्देश की अवहैलना, मुख्य सडक़ों पर व बाजार में जमा रहते है मवेशियों के झूण्ड

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद इन्हें पकड़ा नहीं जा रहा है।  
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Updated: 25 Nov 2017, 8:49 AM IST
गायों से आए दिन हो रही दुर्घटना
टोंक. शहर में घूम रही गायों से आए दिन हो रही दुर्घटनाओं तथा जाम के बावजूद प्रशासन ने आंखें बंद कर रखी है।

टोंक. शहर में घूम रही गायों से आए दिन हो रही दुर्घटनाओं तथा जाम के बावजूद प्रशासन ने आंखें बंद कर रखी है। जबकि मवेशियों की लड़ाई के दौरान चपेट में आकर अब तक कई घायल हो चुके हैं। जयपुर में तो एक विदेशी पर्यटक की मौत हो भी चुकी है।

टोंक शहर तथा हाइवे के भी हालात ऐसे हैं। प्रशासन को शायद यहां भी यही इन्तजार है। शहर में तो हालात ऐसे हैं कि मुख्य सडक़ों पर गायों के झुण्ड घूमते रहते हैं। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद इन्हें पकड़ा नहीं जा रहा है। जबकि स्थायी लोक अदालत ने नगर परिषद को इन्हें पकड़ कर कांजी हाउस में बंद करने के निर्देश दे रखे हैं।

परिषद को इनके मालिकों के खिलाफ थाने में मामला भी दर्ज कराने के अधिकार हैं। इसके बाद भी टोंक जिले में अब तक एक भी मामला गायों से सम्बन्धित किसी भी थाने में दर्ज नहीं कराया गया।

शहर में हजारों
टोंक में आवारा घूमने वाली गायों की संख्या करीब २ हजार है। ये छावनी, बमोर रोड, हाइवे, घंटाघर, पटेल सर्किल, डिपो, सआदत अस्पताल, सुभाष बाजार, बड़ा कुआं, डिपो तथा पुरानी टोंक में घूमती हैं। इनसे दुर्घटनाएं ही नहीं होती, जाम भी लगता रहता है।

उसे भी तोड़ दिया
चौंकाने वाली बात ये भी है कि शहर में नगर परिषद के पास एक भी कांजी हाउस नहीं है। बहुत समय पहले धन्नातलाई व बाद में सोलंगपुरा चौराहे पर कांजी हाउस बनाया गया। ये कांजी हाउस करीब २० साल तक चले। एक दशक पहले तक इसे भी अनदेखा कर दिया।

पांच साल पहले तो इस कांजी हाउस को तोड़ दिया गया। अब वहां नगर परिषद ने शौचालय बना दिए हैं। वर्तमान में नगर परिषद के पास एक भी कांजी हाउस नहीं है। ऐसे में शहर में पकड़ी जाने वाली गायों को रखने की जगह नहीं है। गोशालाएं भी अपनी क्षमता से अधिक गायें नहीं रखती है।

दूध निकाल कर छोड़ देते हैं
शहर में घूम रही गायें आवारा भी नहीं है। इन सबके मालिक हैं। बस वे लोग इन गायों का सुबह-शाम दूध निकाल कर छोड़ देते हैं। इसके बाद ये गायें दिनभर शहर में घूम-घमकर जो भी मिलता है उसे खाती रहती है। इसका सर्वाधिक नुकसान सब्जी तथा फल-विक्रेताओं को होता है।


दान भी खड़ी करता है परेशानी
गायों का चारा डालना सबसे बड़ा दान माना जाता है। कई शुभ अवसरों पर लोग गायों का चारा खिलाते हैं। ऐसे में गायें मुख्य सडक़ों पर ही जमा हो जाती है। कई स्थानों पर तो सुबह चारा ही चारा नजर आता है। लोग गायों के लिए चारा डालकर चले जाते हैं।

करेंगे कार्रवाई
आवारा गायों को लेकर कार्रवाई की जाएगी। ये शहर में घूम रही है तो गलत है।
प्रभातीलाल जाट, उपखण्ड अधिकारी, टोंक।

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