
टोंक. पार्क उजाडक़र दूसरे काम में लेने के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के बयान पर विवाद थम नहीं रहा। लोग अब उनके इस्तीफे की मांग करने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि गत दिनों जयपुर में अशोक परनामी ने न्यायालय स्थगन आदेश के बाद भी एक पार्क में काम कराने की खुली छूट दे दी थी।
परनामी ने कहा कि था ‘सरकार तो काम नहीं करा सकती। उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश है। आप करो, हम तो आंख बंद रखेंगे’। जबकि सरकार को कोर्ट के आदेश की पालना करनी चाहिए। मामले को लेकर जब लोगों से राय जानी गई तो सामने आया कि ऐसा विवादित बयान देने वाले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को इस्तीफा देना चाहिए।
लोगों का कहना है कि भाजपा सरकार का न्यायालय में विश्वास नहीं है। सरकार को हर अपराध का पता है, लेकिन चुप्पी साधे बैठी है। पार्क लोगों के लिए घूमने के लिए होते हैं, ना कि अतिक्रमण कर वाहन पार्किंग के लिए।
भाजपा सरकार की नजर में अपराध बढ़ रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष का ये बयान साबित कर रहा है कि न्यायालय असहाय है। ऐसों को पद पर रहने का अधिकार नहीं है। न्यायालय की पालना सब को करनी चाहिए। साथ ही आरोपितों की मदद नहीं करनी चाहिए।
रामनारायण मीणा, विधानसभा पूर्व उपाध्यक्ष।
सत्तासीन पार्टी के एक प्रदेश पदाधिकारी की ओर से ऐसे व्यक्तव्य शोभा नहीं देते। ऐसा लगता है कि सरकार अतिक्रमियों को बढ़ावा देने पर तुली है। भाजपा को चाहिए कि वे प्रदेशाध्यक्ष से इस्तीफा मांगे।
देवकरण गुर्जर, कांग्रेस नेता
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी सत्ता के नशे में मदहोश हैं। हाइकोर्ट के आदेशों खिलाफ बयान देकर सविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्हें इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
कुलदीपसिंह राजावत, कांग्रेस प्रदेश सचिव।
जिम्मेदार लोगों की ओर से अतिक्रमण की खुली छूट देना न्यायालय की अवमानना है। ऐसे जनप्रतिनिधि के खिलाफ सख्त व कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे जनता में अच्छा मैसेज जाए।
गिर्राज सैन, कांग्रेस नेता
प्रदेशाध्यक्ष व विधायक ने ऐसी बात कहकर लोगों को गलत कार्य के लिए न्यायालय के आदेश के विपरीत उकसाया है। वे लोगों को अवैध निर्माण व अतिक्रमण की सलाह दे रहे हैं तो उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
शिवपाल खण्डवा, प्रदेश कांग्रेस नेता