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lok sabha election 2019: जीत के जश्न में, वो भूल जाते है किसानोंं का दर्द, खुले आसमां के नीचे होती है तुलाई

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Apr 06, 2019
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lok sabha election 2019: जीत के जश्न में, वो भूल जाते है किसानोंं का दर्द, खुले आसमां के नीचे होती है तुलाई

अवधेश पारीक
टोडारायसिंह. चुनावी दौर शुरू होते ही क्षेत्र की समस्याएं चुनावी मुद्दा बन जाती है। चाहे वो किसी भी वर्ग से जुड़ी क्यों न हों। ढाई दशक से गौण मण्डी का दंश झैल रहे टोडारायसिंह गौण कृषि मण्डी से जुड़े व्यापारी, किसान व मजदूर वर्ग की समस्याएं भी कुछ ऐसी ही है।

चुनावी हलचल में राजनैतिक दलों के प्रत्याशी वोट मांगने आते है। उनकी समस्याएं चुनावी मुद्दा बन जाती है। और जीतने के बाद जीत के जश्न में वो (प्रत्याशी) पीडि़तों वर्गों का दर्द भूल जाते है।

इसी दर्द में लाखों रुपए का टैक्स देने के बावजूद प्रशासन की अनदेखी के चलते सुविधाओं की मोहताज गौण कृषि मण्डी में व्यापारी, किसान व मजदूर खुले आसमां के नीचे चिलचिलाती धूप में तुलाई करने को मजबूर है।


उल्लेखनीय है कि प्रशासन की अनदेखी व राजनैतिक उपेक्षा के चलते ढाई दशक पहले मुख्य कृषि मण्डी को गौण कृषि मण्डी में तब्दील कर दिया गया था, तब से मण्डी का विकास नहीं हो पाया। बीसलपुर बांध से जुड़े टोडारायसिंह के सिंचित क्षेत्र में कृषि पैदावार बढ़ी लेकिन सुविधाओं के अभाव में गौण कृषि मण्डी उपेक्षा का शिकार रही।

स्थिति यह है कि बीते दशको में टोडा क्षेत्र से कृषि जिंसो की आवक बढऩे केकड़ी, देवली, दूनी, मालपुरा व टोंक कृषि मण्डियां ही विकसित हुई। इधर, दो वर्ष पहले मण्डी प्रशासन व राजनैतिक हस्तक्षेप के बाद व्यापार मण्डल के प्रयास से गौण कृषि मण्डी में कृषि जिंसो की आवक बढ़ी।

मालपुरा कृषि उपज मण्डी अधिनस्थ टोडारायसिंह गौण कृषि उपज मण्डी से टैक्स में लाखों रुपए की वृद्धि हुई। इसके बावजूद मण्डी प्रशासन की अनदेखी के बीच व्यापारी व किसानों को सुविधाओं से महरूम होना पड़ रहा है।

हालात यह है कि दुकानों के अभाव में व्यापारी केबिन लगाकर आढ़त का संचालन कर रहे है। इधर, छाया व्यवस्था नहीं होने से तिरपाळ के नीचे व्यापारी, किसान व मजदूर गर्मी व बरसात में सिर छुपाते रहते है।

यहीं मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिलने से मण्डी परिसर में मण्डी यार्ड निर्माण, ड्रोम सुविधा, व्यापारियों के माल संग्रहण स्थल (गोदाम) आदि सुविधाओं नहीं होने से किसानों का माल (कृषि जिंस) खुले आसमां के नीचे पड़ा रहता है।

जहां चिलचिलाती धूप में व्यापारी माल की खुली बोली लगाता है तो किसानों की देखरेख में मजदूर पसीने पौछते हुए माल की तुलाई कर बोरियां उठाता नजर आता है। इधर किसानों के लिए पेयजल, ठहराव के लिए विश्राम स्थल भी नहीं है।


इनका कहना है,
मण्डी की समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मण्डी यार्ड, दुकानें व ड्रोम समेत अन्य समस्याएं न केवल व्यापारी बल्कि किसान व मजदूर से भी जुड़ी हुई है। जिन्हें मण्डी प्रशासन को प्राथमिकता से निस्तारण करना चाहिए।

Published on:
06 Apr 2019 08:58 am