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Tonk News: अरब के खजूरों ने बदली खेती की तकदीर, पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने किया कमाल, मिल रही बंपर फसल

Date Palm Crop: टोंक जिले के आवां गांव में पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी की मेहनत से खजूर की बंपर फसल तैयार हुई है। छह साल पहले लगाए गए पौधों पर अब मीठे और रसीले खजूर लद गए हैं।
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टोंक

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Rakesh Mishra

Jun 24, 2026

Date Palm Crop

फार्म पर लगे पेड़ पर लदकद खजूर फलों के साथ डॉ. प्रभुलाल सैनी। फोटो- पत्रिका

टोंक। जिले के आवां निवासी किसान और पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और विश्वास से धरती सोना उगल सकती है। छह साल पहले चांदली मार्ग स्थित खेत में टिश्यू कलेचर और सूक्स पद्धति से लगाए गए बरही किस्म के पिंड़ खजूर अब बंपर फसल दे रहे हैं और राजस्थान के विभिन्न शहरों में अपनी मिठास घोल रहे है। खेत पर लदकद खजूर फलों को देखकर देश-प्रदेश के किसान, कृषि अधिकारी और वैज्ञानिक नवाचार की सराहना कर रहे हैं।

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डॉ. सैनी ने यूएई से लाए गए 140 पौधों को एक बीघा खेत में लगाया था। लगातार देखरेख और मेहनत के बाद पेड़ अब मीठे और रसीले खजूर फलों से लदकद हो गए हैं। जून माह में फल पककर बेर के आकार के हो गए, जिनका स्वाद चखकर लोग दीवाने हो गए। खजूर की मांग बढ़ने लगी तो इन्हें मंडियों के माध्यम से विभिन्न शहरों में भेजा गया। वर्तमान में खेत पर पेड़ की शाखाओं पर लदकद खजूर पकने को तैयार हैं। करीब दस दिनों बाद इन्हें पैक कर राजस्थान के बड़े शहरों की मंडियों में भेजा जाएगा, जहां आमजन इसकी मिठास का स्वाद ले सकेंगे।

खेतों-जंगलों में झूल रहे मिठास भरे गुच्छे

बरवास कस्बे के आसपास के जंगलों और खेतों में इस वर्ष देशी खजूर की भरपूर पैदावार हुई है। मई-जून की गर्मी के बीच फलों से लदे खजूर के पेड़ बच्चों और युवाओं को खासे आकर्षित कर रहे हैं। दूर से ही खजूर के पेड़ों की हरियाली और उन पर लटकते फलों के गुच्छे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। हालांकि खजूर के फल आम लोगों की पहुंच से कुछ दूर रहते हैं, क्योंकि इन पेड़ों की ऊंचाई 10 से 30 फीट तक होती है।

टोंक के भेड़-बकरी पालक भोजाराम गुर्जर ने बताया कि खजूर के फल तोड़ने के लिए "तड़िया" नामक विशेष उपकरण का उपयोग किया जाता है। इसमें लंबे बांस के सिरे पर दरांती लगी होती है, जिससे ऊंचे पेड़ों की शाखाएं और फल आसानी से काटे जा सकते हैं। चरवाहों के अनुसार देशी खजूर के फल अधिक गर्मी और लू के मौसम में अच्छी तरह फलते-फूलते हैं। विज्ञान विषय के शिक्षक राजेन्द्र सिंह चौधरी और राजकुमार वर्मा ने बताया कि यह फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें फ्रक्टोज और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।

इसके अलावा आयरन और कैल्शियम की मौजूदगी को खून की कमी दूर करने तथा हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होती है। आयुर्वेद विशेषज्ञ शिवअवतार गुर्जर ने बताया कि देशी खजूर में पोटेशियम, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और विटामिन डी भी पाए जाते हैं, जो हृदय, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। ग्रामीणों और बुजुर्गों का कहना है कि यह फल प्राचीन समय से ही लोगों की पसंद रहा है।

यूएई से लाई गई किस्में

2007 में कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने बरही, मेदजूल, खलास, जामली और खदरावी सहित छह किस्में यूएई से मंगवाई थीं। इन किस्मों को जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर के सरकारी फार्मों पर लगाया गया, जहां अच्छे परिणाम मिले। आज उनके फार्म पर आने वाले परिचित, किसान, जनप्रतिनिधि और अधिकारी बरही खजूर की मिठास से स्वागत पाकर मुरीद हो जाते हैं।