
टोंक। नगर परिषद क्षेत्र में विकसित हुई करीब 50 कॉलोनियों पर खतरा मंडरा रहा है। यह वो कॉलोनियां है जो बीसलपुर बांध के नहरी क्षेत्र में सिंचित है। ऐसे में बीसलपुर बांध परियोजना ने सिंचित क्षेत्र को बचाने के लिए जिला कलक्टर और नगर परिषद आयुक्त को पत्र भेजा है।
इसमें कहा है कि बीसलपुर बांध परियोजना के नहरी क्षेत्र की सिंचित कृषि भूमि पर विकसित की गई कॉलोनियों को निरस्त किया जाए। उनका अनुमोदन भी हो गया है तो उसे निरस्त किया जाए। साथ ही कॉलोनियां विकसित की जा रही है जो उन्हें तत्काल प्रभाव से रोका जाए और संबंधित खातेदार और कॉलोनाइजरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
राजस्थान उपनिवेशन ने 18 फरवरी 2006 को ही अधिसूचना जारी कर दी थी कि सिंचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाए। ना ही सरकार के किसी प्रोजेक्ट को लागू किया जाए। ऐसा करने पर पहले बीसलपुर बांध परियोजना से एनओसी लेनी पड़ेगी। लेकिन नगर परिषद ने इन क्षेत्रों में कॉलोनी काटते समय एनओसी तक नहीं ली।
जिला मुख्यालय पर नहरी तंत्र के समीप अवैध कॉलोनियों का निर्माण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर परिषद और राजस्व विभाग ने नहरी तंत्र के पास इन कॉलोनियों के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया। नहरी तंत्र के पास कॉलोनियों का निर्माण सिचाई तंत्र के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। जिससे खाद्य आपूर्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विभागों की इस अनदेखी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।
सिंचित क्षेत्र में काटी गई कॉलोनियों का मुद्दा राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया है। इसके बाद हरकत में आए बीसलपुर बांध परियोजना ने जिला कलक्टर और नगर परिषद आयुक्त को पत्र देकर उक्त भूमि को खाली कराने को कहा है। ताकि वह भूमि कृषि कार्य में ही काम में ली जा सके।
बीसलपुर बांध परियोजना ने नहरी क्षेत्र की सिंचित भूमि को लेकर सर्वे किया। इसमें सामने आया कि लहन, वजीरपुरा और बिछारस क्षेत्र में सिंचित कृषि भूमि पर ही कॉलोनियां काट दी गई है। जबकि नियमानुसार गलत है। राजस्व विभाग और नगर परिषद की लापरवाही से इन क्षेत्रों में 50 कॉलोनिया कट गई। ऐसे में परियोजना ने जिला कलक्टर और आयुक्त को पत्र लिखा है।
नहरी क्षेत्र को लेकर 18 फरवरी 2006 को राजस्थान उपनिवेशन की अधिसूचना जारी हुई थी। साथ ही बीसलपुर सिंचाई परियोजना, खाद्य सुरक्षा एक्ट तथा भूमि अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत सिंचित भूमि का भू-परिवर्तन नहीं किया जाना है। लेकिन शहर में इन सब की अनदेखी बरती गई।
बीसलपुर बांध परियोजना के नहरी क्षेत्र की सिंचित भूमि का भू-परिवर्तन नहीं हो सकता। लहन, वजीरपुरा और बिछारस में कॉलोनी विकसित हो रही है। ऐसे में जिला कलक्टर और आयुक्त को इन पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
-मनीष बंसल, अधिशासी अभियंता बीसलपुर बांध परियोजना