
Rajasthan Farmers : दुर्गापुरा ढाणी में अपने बाग में ऊषा देवी अपने पति मूलचन्द कोली के साथ। फोटो पत्रिका
Rajasthan Farmers : मेहनत, लगन और प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास हो तो बंजर जैसी जमीन भी सोना उगल सकती है। इसका उदाहरण टोंक के दूनी क्षेत्र की दुर्गापुरा ढाणी निवासी ऊषा देवी कोली ने पेश किया है। उन्होंने करीब तीन दशक पहले खेत में आंवला और नींबू का बाग लगाकर ऐसी सफलता हासिल की, जो आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। ऊषा देवी के पति एवं तत्कालीन नर्सिंग ऑफिसर मूलचंद कोली ने मकान के पास चार बीघा जमीन खरीदी थी, जहां सामान्य फसल से केवल घरेलू जरूरत भर का उत्पादन होता था।
वर्ष 1995 में ऊषा देवी ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में खेत में करीब 200 आंवला और 50 नींबू के पौधे लगाए। उन्होंने पौधों की देखभाल पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से शुरू की और गोबर खाद के साथ जैविक उपचार अपनाया।
टोंक के दूनी क्षेत्र की दुर्गापुरा ढाणी निवासी ऊषा देवी ने पौधों की देखभाल में कभी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया। उन्होंने गोबर खाद के साथ धतूरा और नीम की पत्तियों से तैयार प्राकृतिक मिश्रण का उपयोग कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए किया। यही कारण है कि वर्षों बाद भी बाग के अधिकांश पेड़ स्वस्थ और फलदार बने हुए हैं।
लगातार तीन वर्षों की मेहनत के बाद वर्ष 1998 में पहली बार बाग से करीब एक टन आंवला और नींबू का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 15 हजार रुपए का मुनाफा मिला। इसके बाद उत्पादन और आय दोनों में लगातार वृद्धि होती रही। वर्ष 2020 तक बाग से सालाना डेढ़ से दो लाख रुपए की आमदनी होने लगी।
वर्ष 2021 में मूलचंद कोली के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भी पूरी तरह बाग की जिम्मेदारी संभाल ली। वर्तमान में वर्ष 2026 तक इस बाग से परिवार को प्रतिवर्ष दो से तीन लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है। यह देखकर क्षेत्र के किसानों में इस तरह की बागवानी की तरफ रूचि पैदा हो रही है, और वे भी इस तरह की बागवानी के लिए उत्सुक हो रहे हैं।
किसानों तक कृषि विभाग के नवाचार और तकनीकी जानकारी पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। किसानों की सूचना पर मौके पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान किया जाता है। क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा मिलने से कई किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
चेतन शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी
Published on:
31 May 2026 01:52 pm
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