
गहलोद हाई लेवल ब्रिज पर लगाई गई बैरिकेडिंग। फोटो- पत्रिका
टोंक। बनास नदी के गहलोद स्थित नवनिर्मित हाई लेवल ब्रिज पर लोड टेस्ट प्रक्रिया शुरू हो गई। पुल की मजबूती, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह परीक्षण भारतीय सड़क मानकों के अनुसार किया जा रहा है। परीक्षण कार्य पांच दिनों तक चलेगा, जिसके दौरान आवागमन के लिए झिराना-सोहेला मार्ग को वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है। लोड टेस्ट किसी भी पुल को यातायात के लिए खोलने से पहले की जाने वाली महत्वपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया होती है।
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इस परीक्षण में भारी वजन वाले वाहनों को पुल पर अलग-अलग स्थानों पर खड़ा कर उसकी भार वहन क्षमता, कंपन स्तर, झुकाव तथा संरचनात्मक स्थिरता की जांच की जाती है। जांच के दौरान विशेष उपकरणों की मदद से यह देखा जाता है कि पुल पर भार पड़ने के बाद उसमें निर्धारित सीमा से अधिक कंपन, दरार, असामान्य झुकाव या संरचनात्मक कमजोरी तो नहीं आ रही। लोड टेस्ट में पुल को आइआरसी की ओर से निर्धारित मापदंडों पर खरा उतरना जरूरी होता है। सभी मानकों की पुष्टि के बाद ही पुल को आमजन के आवागमन के लिए सुरक्षित माना जाता है। यह पुल 30 मई तक वाहनों के लिए बंद रहेगा।
अधिशासी अभियंता नागेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि बनास नदी के गहलोद स्थित नवनिर्मित हाई लेवल ब्रिज की क्षमता 243 टन भार वहन करने की है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इसी आधार पर जांच की है। हालांकि इतने भारी वाहन पुल से नहीं गुजरते, लेकिन विभाग ने भविष्य में भारी वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए तैयारी की है।
विभाग ने बनास नदी पर हाई लेवल ब्रिज का काम तो पूरा कर दिया, लेकिन इस पुल से संबंधित सड़कों की हालत बेहद खराब है। गहलोद से नानेर होते हुए धोली तथा मालपुरा जाने वाली सड़क अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बड़े वाहन तो दूर, कार से सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसा ही हाल गहलोद से नाथड़ी मार्ग का है, जहां सहोदरा नदी पर बना पुल विभागीय अनदेखी के चलते पिछले एक साल से अधूरा पड़ा है। इस ओर ना तो जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और ना ही जनप्रतिनिधि। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि ये दोनों मार्ग टोंक को सीधे तौर पर जयपुर और अजमेर जिले से जोड़ते हैं।
बनास नदी के गहलोद स्थित नवनिर्मित हाई लेवल ब्रिज के बाद एक सड़क मालपुरा और टोडारायसिंह उपखंड को जोड़ती है, जबकि दूसरी सड़क पीपलू उपखंड तक पहुंचती है। इस पुल से तीनों उपखंडों के करीब 150 गांवों के लोग टोंक जिला मुख्यालय तक पहुंचते हैं। पुल बनने से अब बरसात के दौरान लोगों को रुकना नहीं पड़ेगा। हालांकि जर्जर सड़कों को लेकर मालपुरा-टोडारायसिंह और निवाई-पीपलू विधायक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पुल की मजबूती, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में लोगों को इसका लाभ मिल सके। सड़कों को लेकर भी योजना बनाई जाएगी।
Updated on:
27 May 2026 04:30 pm
Published on:
27 May 2026 04:27 pm
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