25 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jalore Water Crisis: 21 दिन के क्लोजर के बाद नर्मदा का पानी पहुंचा तैतरोल, जालोर में जल संकट के बीच राहत भरी खबर

21 दिन के क्लोजर के बाद नर्मदा परियोजना का पानी तैतरोल एफआर प्रोजेक्ट तक पहुंच गया है। इससे जालोर जिले में लंबे समय से चल रहे पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

3 min read
Google source verification
Jalore water crisis

तैतरोल तक पहुंचा पानी। फोटो- पत्रिका

जालोर। नर्मदा परियोजना में मरम्मत और रखरखाव कार्य के लिए लिया गया 21 दिन का क्लोजर पूरा होने के बाद पानी तैतरोल स्थित एफआर प्रोजेक्ट तक पहुंच गया। विभागीय जानकारी के अनुसार 23 मई देर रात तैतरोल तक पानी की आवक शुरू हो गई थी, लेकिन उस समय पानी का लेवल 1 मीटर था। पानी की शुरुआती आवक के दौरान केनाल की सफाई के लिए गंदे पानी की निकासी गांधव पुल लूणी नदी के पास की गई।

यह वीडियो भी देखें

दोपहर में पानी का लेवल 2.50 मीटर पार करने के बाद मुख्य केनाल से तैतरोल प्लांट में पानी की आवक शुरू हो गई। विभागीय जानकारी के अनुसार पानी की आवक शुरू होने के साथ आरडब्ल्यूआर स्टॉक में इजाफा होने लगा और पानी की पंपिंग भी शुरू कर दी गई। गौरतलब है कि भीषण गर्मी के मौसम में क्लोजर लेने के दौरान जल संकट गहरा गया है। वर्तमान में जालोर शहर में पानी की आपूर्ति 5 से 7 दिन में एक बार हो पा रही है।

22 को छोड़ा पानी

22 मई को सुबह करीब 7.15 बजे जीरो पॉइंट से पानी छोड़ा गया। तैतरोल पंपिंग प्लांट तक पानी पहुंचने के साथ अब आगामी दो दिनों में जालोर जिले के पंपिंग स्टेशनों तक पानी की सप्लाई हो जाएगी, जिसके बाद तय शेड्यूल के अनुसार पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि 1 मई से नर्मदा परियोजना का क्लोजर शुरू होने के बाद जिले के कई गांवों और शहरों में पेयजल संकट गहराने लगा था। एफआर प्रोजेक्ट और स्टॉक टैंकों में लगातार जलस्तर घटने से हालात चिंताजनक बन गए थे।

क्लोजर के दौरान सामने आई परेशानी

21 दिन के क्लोजर ने इस बार नर्मदा परियोजना पर निर्भर क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति भी सामने ला दी। स्टॉक सीमित होने से कई इलाकों में जल संकट गहरा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ा। कई वार्डों में सप्लाई का समय घटाना पड़ा। लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर निजी टैंकर मंगवाए। नर्मदा केनाल में पानी छोड़े जाने की सूचना मिलते ही जिलेभर में राहत का माहौल नजर आया। लोगों को उम्मीद है कि अब पेयजल संकट से राहत मिलेगी और नियमित जलापूर्ति बहाल हो सकेगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे थे।

अभी ऐसी है शहरी सप्लाई की स्थिति

जालोर शहर में 48 से 72 घंटे में सप्लाई का शेड्यूल था। नर्मदा परियोजना में क्लोजर से पहले दावा किया जा रहा था कि क्लोजर के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। यह भी कहा जा रहा था कि क्लोजर के लिए आरडब्ल्यूआर में पर्याप्त पानी मौजूद है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत रही। पिछले 24 दिनों की बात करें तो जालोर शहरी क्षेत्र में सप्लाई का शेड्यूल 5 से 7 दिन के बीच पहुंच चुका है। पिछली बारिश के मौसम के बाद जलापूर्ति शेड्यूल की यह सबसे खराब स्थिति है, जो सप्लाई सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। 24 मई को घरेलू ही नहीं, सरकारी आवासों तक में टैंकरों से पानी की सप्लाई करनी पड़ी।

इस तरह की बनी स्थिति

  • 1 मई को नर्मदा परियोजना का क्लोजर प्रभावी हुआ।
  • 22 मई सुबह जीरो पॉइंट से मुख्य केनाल में पानी छोड़ा गया।
  • 23 मई मध्यरात्रि के बाद तैतरोल तक पानी पहुंचा।
  • 24 मई दोपहर बाद प्लांट में पानी की आवक शुरू हुई।
  • केनाल में 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

इन्होंने कहा

क्लोजर पूरा होने के बाद नर्मदा परियोजना में पानी की आवक शुरू हो गई है। जरूरत के अनुसार 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। आगामी दो से तीन दिन में सप्लाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाएगा।

  • अशोक कैथल, एक्सईएन, नर्मदा सिंचाई परियोजना

पानी का लेवल ढाई मीटर से अधिक पहुंचने के बाद आरडब्ल्यूआर में पानी की पंपिंग शुरू की गई। पानी की आवक जारी रहने के साथ पंपिंग में भी बढ़ोतरी होगी।

  • विपुल कुमार, एईएन, नर्मदा एफआर प्रोजेक्ट