
बीसलपुर बांध के जलभराव में मत्स्य संवेदक के अधीन मछली पकडऩे वाले मछुआरों पर भी कोहरे व सर्दी का असर नजर आने लगा है। पिछले एक पखवाड़े पूर्व से क्षेत्र में बदले मौसम के मिजाज को लेकर हुई बारिश के बाद क्षेत्र में इन दिनों तेज सर्दी व गलन का असर शुरू होने लगा है। तेज सर्दी का असर क्षेत्र के लोगों के साथ ही बांध के मछुआरों पर पडऩे लगा है।
सर्दी व कोहरे के चलते बांध के जलभराव में मछुआरे भी अपनी नावों ( किस्तियों) को शाम को जल्दी ही किनारे पर लगाने लगे हैं। वही देर सुबह तक कोहरे के कारण मछुआरे जलभराव में जाल डालने से कतराने लगे हैं। इसी प्रकार बीसलपुर बांध स्थल पर पर्यटकों की चहल कदमी भी शाम को जल्दी ही सिमटने लगी है। वही दोपहर तक भी बांध क्षेत्र सुनसान नजर आने लगा है। जिससे बीसलपुर के दुकानदारों में भी ग्राहकी की कमजोरी है।
हादसों से सहमे मछुआरे
बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में लहरों के दौरान पूर्व में भी तीन बार हादसे हो चुके हैं। वही इन दिनों कोहरे के चलते मछुआरे भी सहमें हुए हैं। वो भी इन दिनों कोहरे के चलते जलभराव में जाने से कतराते हैं। कही जलभराव के बीच में जाने के मौसम खराब होकर लहरें उठ जाए।
मत्स्य आखेट नहीं हो पा रहे
उल्लेखनीय है कि बीसलपुर बांध क्षेत्र में वन क्षेत्र होने से पर्यटकों के ठहरने व खाने आदि की व्यवस्था को लेकर होटल व गेस्ट हाउस नहीं होने से अधिकांशतर पर्यटक यहां रुकने से परहे•ा करते हैं। वहीं बीसलपुर बांध क्षेत्र में बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल आदि राज्यों के मछुआरे बीसलपुर बांध पर मत्स्य संवेदक के अधीन मत्स्य आखेट के लिए आते हैं। जिन्हें सर्दी के कारण पर्याप्त मत्स्य आखेट नहीं हो पाने के चलते रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा है।