
टोंक निकाय चुनाव रिजल्ट (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)
Tonk Civic Body Election Result: दो चरणों में हुए नगर निकाय चुनाव के सोमवार को घोषित नतीजों ने टोंक जिले की सियासत का नया गणित सामने ला दिया है। टोंक नगर परिषद में कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जिले की पांच नगर पालिकाओं में भाजपा ने बहुमत के साथ बोर्ड गठन की स्थिति मजबूत कर ली है।
बता दें कि मालपुरा, टोडारायसिंह, लांबाहरिसिंह, डिग्गी और दूनी में भाजपा की जीत पार्टी के लिए बड़ी सियासी बढ़त मानी जा रही है। वहीं उनियारा में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। निवाई में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से एक सीट दूर रह गई। देवली और पीपलू में भी भाजपा बहुमत के करीब है, ऐसे में यहां बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो सकती है।
जिले की सियासत में सबसे ज्यादा नजरें टोंक नगर परिषद के नतीजों पर थीं। यहां कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ते हुए 59 में से 32 वार्डों में जीत दर्ज की। भाजपा को 19 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 8 सीटें मिलीं। वार्ड संख्या 2 में चुनाव नहीं होने के कारण 60 वार्ड वाली नगर परिषद में इस बार 59 वार्डों के ही परिणाम घोषित किए गए।
कांग्रेस को मिले स्पष्ट बहुमत के साथ टोंक नगर परिषद पर पार्टी का कब्जा बरकरार रहा। इसे सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। चुनाव परिणाम ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की पकड़ को भी मजबूत किया है।
जिले में भाजपा के लिए सबसे बड़ी राहत पांच नगर पालिकाओं के नतीजों से मिली। मालपुरा, टोडारायसिंह, लांबाहरिसिंह, डिग्गी और दूनी में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इन निकायों में भाजपा की जीत के बाद बोर्ड गठन की तस्वीर लगभग साफ हो गई है।
लांबाहरिसिंह, डिग्गी और दूनी के परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये तीनों निकाय हाल ही में ग्राम पंचायत से नगर पालिका में बदले हैं। नए नगर निकायों के पहले चुनाव में भाजपा का मजबूत प्रदर्शन पार्टी के लिए अहम सियासी बढ़त माना जा रहा है। दूनी को छोड़कर बाकी तीन निकाय मालपुरा विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। यहां से जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी विधायक हैं। मालपुरा और टोडारायसिंह में भाजपा के स्पष्ट बहुमत ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है।
देवली में भाजपा बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर रह गई। 35 वार्डों वाले निकाय में भाजपा ने 17, कांग्रेस ने 8 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की। बोर्ड बनाने के लिए 18 पार्षदों की जरूरत है। ऐसे में भाजपा को बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। परिणाम आते ही निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा के सामने अब इन पार्षदों को अपने पक्ष में करने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस भी इस सियासी समीकरण में संभावनाएं तलाश सकती है।
निवाई में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से एक सीट दूर रह गई। ऐसे में यहां भी बोर्ड गठन का फैसला केवल सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी के आधार पर तय नहीं होगा। निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सत्ता की चाबी बन सकता है।
पीपलू में भाजपा बहुमत के करीब पहुंची है। यहां भी बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रहने की संभावना है। इस तरह टोंक जिले के निकाय चुनाव में एक तरफ कांग्रेस ने टोंक नगर परिषद में अपना गढ़ बचाया है, तो दूसरी ओर भाजपा ने पांच पालिकाओं में मजबूत बढ़त बनाकर जिले की स्थानीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की है। अब नजर उन निकायों पर है, जहां बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक साबित होगा।
Updated on:
14 Sept 2026 05:36 pm
Published on:
14 Sept 2026 05:36 pm
