
Tonk Suman Murder Case: टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने प्रेमिका की हत्या के मामले में प्रेमी, उसकी मां, भाई और बहन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशिष्ट जज आरती माहेश्वरी ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कविता के जरिए पूरे घटनाक्रम और न्याय का संदेश भी बयां किया। अभियोजन के अनुसार, प्रेमी ने वर्ष 2022 में अपनी प्रेमिका सुमन को धोखे से जहर पिलाकर मार डाला था। इस वारदात में उसकी मां, भाई और बहन ने भी उसका साथ दिया था।
फैसला सुनाते हुए जज ने कहा- 'प्रेम कोई अपराध नहीं, पर विश्वासघात क्षम्य नहीं। न्याय का संदेश यही कि निर्दोष का रक्त व्यर्थ नहीं।'
कुछ वर्षों का रिश्ता था, विश्वासों का संसार था,
क्या पता था उस मासूम को, मौत का षड्यंत्र तैयार था।
जाति के नाम पर प्रेम को विष का प्याला पिलाया,
जिसने जीवनभर साथ देने का वादा किया, उसी ने जीवन मिटाया।
मां, भाई और बहन के संग मिलकर मानवता को शर्मसार किया,
प्रेमिका के पवित्र विश्वास का निर्ममता से संहार किया।
विसरा में मिला विष, एटीएम बना गवाही,
सच को आखिर कब तक छिपाती यह कहानी?
न्याय की कलम अपराधियों को
उनके कर्मों की सजा दिलाएगी।
प्रेम कोई अपराध नहीं,
पर विश्वासघात क्षम्य नहीं।
न्याय का संदेश यही है-
निर्दोष का रक्त व्यर्थ नहीं जाएगा।
टोंक जिले के पचेवर थाना क्षेत्र के नगर गांव की रहने वाली सुमन जयपुर के वैशाली नगर में किराए के मकान में रहती थी। सांगानेर के शिकारपुरा निवासी प्रधान से उसका प्रेम प्रसंग था। 11 सितंबर 2022 को प्रधान सुमन को लेकर नगर आया और इसके बाद जयपुर लौट गया। 14 सितंबर को उसने सुमन के परिजनों को फोन कर बताया कि उसे सांप ने काट लिया है और अजमेर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुमन के परिजन जब अजमेर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को गांव लाकर परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। कुछ दिन बाद सुमन की मौत को लेकर परिवार को शक हुआ। इसके बाद उसके भाई ने पचेवर थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस की जांच में सामने आया कि प्रधान ने सुमन को जहर देकर मार डाला था। पुलिस के अनुसार, उसकी मां, भाई और बहन ने भी इस वारदात में उसका साथ दिया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ चालान पेश किया।
बुधवार को एससी-एसटी कोर्ट की विशिष्ट जज आरती माहेश्वरी ने प्रधान पुत्र जगदीश, उसकी मां संजना देवी, भाई सवाईराम और बहन सुशीला को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
जज आरती माहेश्वरी ने वर्ष 2025 में किसान की हत्या के मामले में भी दोषियों को कविता के जरिए सजा सुनाई थी। उस दौरान उन्होंने किसान की जिंदगी और हत्या की घटना को कविता के माध्यम से अदालत के सामने रखा था।