
राजमहल. बीसलपुर व राजमहल वन क्षेत्र में वन विभाग की अनदेखी से वन्यजीव कभी दुर्घटना का तो कभी शिकारियों के निशाने का शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं। इसके चलते गुरुवार सुबह भी राजमहल वन नाके के पीछे फिर से एक जरख मृत मिला। मृत जरख का शव लगभग दो दिन पुराना बताया जा रहा है। उसके मुंह से रक्त स्त्राव जारी था।
वनकर्मी इसे भी दुर्घटना का शिकार होना मान रहे हैं। वहीं ग्रामीण इसे चरवाहे या फिर शिकारी की ओर से सिर पर लाठी से वार करना बता रहे हंै। ग्रामीणों का कहना है कि मृत अवस्था मेें पाया गया जरख वाहन की टक्कर से घायल होता तो सडक़ से दूर जंगल में नहीं पहुंचता। इधर, सूचना पर वनपाल राकेश चौधरी ने मृत जरख का वन नाका राजमहल में पशु चिकित्सक प्रीति मीणा से पोस्टमार्टम कराकर शव दफना दिया।
वन्य जीवों की होती मौत पर विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जा रहा है। इससे पहले गत कुछ दिनों पूर्व ही बीसलपुर मार्ग पर दुर्घटना का शिकार होकर एक जरख अकाल मौत का ग्रास बन चुका है। वहीं उससे पूर्व माताजी रावता गांव के करीब वन क्षेत्र में एक जरख की मौत हो चुकी है।
नाके पर पर नहीं कोई तैनात
बीसलपुर व राजमहल वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए राजमहल में वन नाका स्थापित है। जहां वन पाल सहित अन्य आधा दर्जन कर्मचारियों के पद सर्जित हंै, लेकिन कई महीनों से उक्त वन नाका खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं रहता है। कभी-कभार वनकर्मी आते हंै, लेकिन नाके पर ही कागजी खानापूर्ति कर देवली लौट जाते हैं।
कर्मचारियों की कमी है
कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसा हुआ है, लेकिन जल्द ही राजमहल नाके पर कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, जिससे वन क्षेत्र में बराबर गश्त की जा सके। वहीं मृत जरख के पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत के कारणों का पता लग सकेगा।
रघुवीर सिंह, क्षेत्रीय वन मण्डल अधिकारी देवली।