
टोंक. नगर परिषद की ओर से बनाए गए मास्टर प्लान पर अतिक्रमण ने ग्रहण लगा दिया है। मास्टर प्लान को शहर की सुंदरता और सुविधाओं के मध्यनजर बनाया गया था, लेकिन अनदेखी के चलते यह मास्टर प्लान धूमिल हो गया है। हालांकि इसके लिए नगर परिषद में अलग से विभाग का गठन किया गया, लेकिन विभाग के अधिकारी कर्मचारी कभी कभार ही इस प्लान पर ध्यान देते हैं।
हालांकि विभाग की ओर से अतिक्रमण पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन पुख्ता कार्रवाई नहीं होने पर शहर अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। बाजार का आलम यह है कि जाम लगता रहता है। सडक़ें भी निर्माण में आ चुकी है।
हालांकि नगर परिषद अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाती है, लेकिन वह भी राजनैतिक दबाव के चलते आगे नहीं बढ़ पाता है। गत 6 महीने में ही नगर परिषद ने अभियान चलाया, लेकिन फौरी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दी।
नगर परिषद ने शहर के छावनी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का जोर-शोर से प्रचार प्रसार किया, लेकिन कुछ दूरी तक ही अभियान चला और फिर रोक दिया गया। इसी प्रकार घंटाघर से लेकर बड़ा कुआं तक बाजार अतिक्रमण की चपेट में है।
जबकि टोंक शहर के इस बाजार की बसावट पैदल चलने वालों के लिए अलग से थी। वहीं राहगीरों के लिए धूप और बरसात से बचने तक की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जयपुर की तर्ज पर टोंक में भी बाजार में दुकानों के आगे बरामद थे, लेकिन अब एक भी बरामदा नजर नहीं आता है।
उन बरामदों पर दुकानें बन गई है। चार साल पहले उच्च न्यायालय ने मास्टर प्लान को लेकर आदेश जारी किए, लेकिन इन आदेशों की भी टोंक में अनदेखी है। जबकि मास्टर प्लान के तहत लोगों को सुविधाएं भी मुहैया करानी चाहिए। इनमें पार्क, पार्किंग, स्वच्छता, सडक़, पेयजल समेत अन्य शामिल है।
सुविधाओं बनी हुई दरकार
नगर परिषद की शहर में स्वीकृत 190 कॉलोनियां है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की वहां दरकार है। जबकि कॉलोनाइजर की ओर से कॉलोनी में सभी सुविधाएं दर्शाई जाती है, लेकिन मौके पर मौजूद नहीं है। ऐसे में लोगों को मास्टर प्लान का लाभ नहीं मिल रहा है।