आवां कस्बे में मकर संक्रांति पर दड़ा का खेल खेला गया। गोपाल चौक में आयोजित परंपरागत दड़ा महोत्सव में खिलाड़ियों और दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया।
आवां(टोंक). आवां कस्बे में मकर संक्रांति पर दड़ा का खेल खेला गया। गोपाल चौक में आयोजित परंपरागत दड़ा महोत्सव में खिलाड़ियों और दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया। करीब दो घंटे की खींच-तान के बाद दड़ा जब दूनी दरवाज़े की तरफ चला गया तो यह माना गया कि यह साल क्षेत्र के लोगों के लिए ख़ुशहाल होगा। धन और धान्य से क्षेत्र भरपूर रहेगा।
सरपंच दिव्यांश भारद्वाज ने कहा कि सच होगी दड़े की भविष्यवाणी, जमकर बरसेगा पानी, घर-घर होगी गुड धानी। यह सुनकर ग्रामीण नाचने- गाने लगे। इससे पहले सुबह साढ़े 11 बजे पूर्व महाराजा जयेन्द्र सिंह के गढ़ में 70 किलो वजनी दड़े की पूजा की गई। पूजा में पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इसके बाद दड़े को गोपाल चौक में रखा गया। हजारों लोग दड़े को ठोकरें मारते हुए दूनी दरवाजे तक लेकर गए।
खेल की खास बातें...
दड़ा का वजन - 70 किलो
खेल मैदान का क्षेत्रफल- 300 स्क्वायर मीटर
दोनों गोल पोस्ट की दूरी- 400 मीटर
कितने घंटे चला खेल 02
कितने गांवों के लोग भाग लेते हैं 13
लोगों की भागीदारी करीब 8000
कितने साल पुरानी परम्परा 150