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उन्नत तकनीक अपना रहे किसान, पैदावार संग आमदनी में हो रहा इजाफा

कृषि कार्य किसानों के लिए आजीविका का बड़ा साधन बनता जा रहा है। किसी समय में किसान सामान्य खेती कर अपना जीवन यापन करता था लेकिन अब किसानों ने पारंपरिक खेती की बजाए नवाचार किए जिसके बूतें सालाना लाखों रूपए कमा रहे हैं।    
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Dec 24, 2023
उन्नत तकनीक अपना रहे किसान, पैदावार संग आमदनी में हो रहा इजाफा
उन्नत तकनीक अपना रहे किसान, पैदावार संग आमदनी में हो रहा इजाफा

उपखंड क्षेत्र में अब कृषि कार्य किसानों के लिए आजीविका का बड़ा साधन बनता जा रहा है। किसी समय में किसान सामान्य खेती कर अपना जीवन यापन करता था लेकिन अब किसानों ने पारंपरिक खेती की बजाए नवाचार किए जिसके बूतें सालाना लाखों रूपए कमा रहे हैं। उपखंड क्षेत्र के संदेड़ा फार्म के 46 वर्षीय दीनदयाल चौधरी जैविक व उन्नत तकनीक से खेती में नवाचार कर प्रतिवर्ष लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।

ऐसे की शुरुआत

दीनदयाल चौधरी ने बताया कि वर्ष 2002 से वर्ष 2020 तक गांव के ही एक निजी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाते रहे। परिवार का पालन-पोषण कृषि पर आधारित था, ऐसे में शुरू से ही कृषि विभाग की कई कार्यशाला, संगोष्ठियों में हिस्सा लिया। इसके चलते बागवानी की ओर कदम बढ़ाने की ठानी। एप्पल बैर की खेती को लेकर सोशल मीडिया पर चितौड$गढ़ जिले के बड़ी सादड़ी के एक किसान का वीडियो देखा। जिस पर किसान के उपलब्ध नंबरों पर संपर्क गांव के आधा दर्जन किसानों के साथ बड़ी सादड़ी पहुंचकर किसान की ओर से की जा रही एप्पल बैर खेती की जानकारी जुटाई।

चार किसानों ने शुरू की खेती

दीनदयाल चौधरी ने बताया कि किसान से मिली जानकारी के अनुसार चितौड$गढ़ नर्सरी के माध्यम से कोलकाता से एप्पल बैर के 35 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से कुल 4000 पौधे मंगवाए। उसने अपने स्वयं के खेत में 1000 पौधे लगाए। वहीं गांव के ही किसान प्रहलाद, दीनदयाल, हंसराज ने भी एक-एक हजार पौधे लगाए हैं। किसान दीनदयाल ने बताया कि दो वर्ष में उसे करीब 10 लाख रुपए का मुनाफा हो चुका हैं। वहीं इस वर्ष अब बिक्री शुरू होगी।

विभाग के प्रशिक्षण में ली जानकारी

किसान दीनदयाल विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आमंत्रित किए जाने पर वहां पहुंचते थे। कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी व वानिकी, कृषि विज्ञान केन्द्र सहित सभी प्रशिक्षणों में वह हिस्सा लेने पहुंचे तहां जाने से कृषि व वानिकी की उन्नत खेती की उसे समुचित जानकारी हो चुकी थी। साथ ही संदेड़ा फार्म नवाबों का बीड़ था। जहां नवाबों के समय झाडिय़ां थी। जहां पूर्वजों ने झाड़ को हटाकर सरसों, गेहूं की खेती कर रहे थे। ऐसे में शुरुआत में फिर से सरसों की जगह बैर की खेती करने की ठानी तो परिजनों ने यहीं कहा कि झाड़ को हटाने में बरसों लग गए, अब फिर से वहां झाड़ लगाने जा रहा हैं।

रसायनों का नहीं कर रहे प्रयोग

किसान दीनदयाल चौधरी ने बताया कि 4 बीघा में की जा रही उन्नत खेती में रसायनों का उपयोग नहीं किया जाकर जैविक खाद उपयोग में लिया जा रहा है। नीम, गौमूत्र, पुराना गोबर, जड़ी बूटियों के पेस्टीसाइड का उपयोग करने से बैर में मिठास होने के साथ प्रति पेड़ 20 से 40 किलों तक बैर लदे हैं। किसान ने बताया कि खेती की सफलता को देखकर कई अन्य किसान भी जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। जिन्हें भी प्रेरित किया जा रहा हैं। किसान ने बताया कि बैर को कैरटों में भरकर पिकअप वाहन में भरकर फल मण्डी भेजते हैं। वहीं गांव में भी इनकी खपत होती हैं। किसान ने बताया कि प्रतिवर्ष लाखों रुपए की आय हो रही है।

Published on:
24 Dec 2023 07:58 pm