टोंक

1901 के बाद पहली बार! टोंक के 9 नवाबों का ‘शिजरा’ अब हिंदी में, खुलेंगे 7 पीढ़ियों के छिपे राज

टोंक रियासत के 9 नवाबों के खानदान की पूर्ण वंशावली (शिजरा) पहली बार हिंदी भाषा में प्रकाशित की गई है। पूर्व नवाब आफताब अली खां ने इसे जारी करते हुए बताया कि इसमें 3 से 7 पीढ़ियों तक का विस्तृत विवरण शामिल है।
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Oct 07, 2026
tonk nawab family shijra in hindi
टोंक के नवाबों के खानदानों का हिंदी में तैयार शिजरा जारी करते पूर्व नवाब आफताफ अली खान (पत्रिका फोटो)

Tonk Nawab Family Shijra in Hindi: पूर्व रियासत टोंक के नौ नवाबों के खानदानों की वंशावली (शिजरा) पहली बार पूर्ण रूप से तैयार की गई है। इसमें प्रत्येक खानदान की तीन से सात पीढ़ियों तक का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। पूर्व नवाब आफताब अली खां ने शिजरे को प्रकाशन के लिए जारी करते हुए इसके सफल प्रकाशन की शुभकामनाएं दीं।

1901 में पहली बार उर्दू में प्रकाशित हुआ था शिजरा

याकूब अली खां ने बताया कि टोंक के नवाबों के खानदानों का शिजरा पहली बार असगर अली आबरू ने वर्ष 1901 में उर्दू भाषा में 'हदीका-ए-राजस्थान टॉक' नाम से प्रकाशित किया था। उस समय इसमें चार नवाबों के खानदानों का विवरण नवाब इब्राहीम अली खां के मध्य दौर तक ही उपलब्ध था। इसमें केवल दो पीढ़ियों का उल्लेख किया गया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद नवाबों के अन्य वंशजों ने भी अपने-अपने खानदानों की वंशावली तैयार करवाई। इनमें कुछ शिजरे हस्तलिखित रूप में तैयार किए गए, जबकि कुछ को प्रकाशित भी कराया गया।

बीमारी के कारण अधूरा रह गया था प्रयास

याकूब अली खां के अनुसार, 'हदीका-ए-राजस्थान' के प्रकाशन के बाद सईद अहमद खां और मोहम्मद नईम खां ने भी टोंक के सभी नवाबों के खानदानों का पूर्ण शिजरा तैयार करने का प्रयास किया था। हालांकि, लंबी बीमारी के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो सका और वंशावली का काम अधूरा रह गया।

पहली बार हिंदी में प्रकाशित होगी पूरी वंशावली

अब पहली बार टोंक के नौ नवाबों के खानदानों का पूर्ण शिजरा हिंदी भाषा में प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें तीन से सात पीढ़ियों तक के वंशक्रम को शामिल किया गया है। इससे आम लोगों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को पूर्व रियासत टोंक के नवाबों के खानदानों तथा उनके वंशक्रम की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।

याकूब अली खां ने बताया कि यह शिजरा केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि नवाबों के वंशजों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। विशेष रूप से खानदानी पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया में वंशावली प्रमाण के रूप में इसकी उपयोगिता हो सकती है। इससे टोंक के नवाबों के परिवारों की पीढ़ियों का क्रम एक स्थान पर उपलब्ध हो सकेगा।

Updated on:
07 Oct 2026 02:26 pm
Published on:
07 Oct 2026 02:26 pm