
टोंक. जिले में साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है। साइबर क्राइम के एक मामले में एक श्रमिक के खाते से पांच दिन में एक लाख 59 हजार रुपए पार हो गए। पीडि़त बहीर निवासी असलम खान ने बताया कि उसका खाता आईडीबीआई बैंक में है।
6 अक्टूबर को एक फोन आया तथा बात करने वाले व्यक्ति उसे आईडीबीआई बैंक का कार्मिक होना बता कर खाता चैक करने के लिए मोबाइल पर आए ओटीपी नम्बर बताने का कहा। इस पर असलम ने उसे नम्बर बता दिया।
ऐसा छह अक्टूबर को पांच बार हुआ। इस दौरान उसके खाते से 48 हजार 996 रुपए पार हो गए। उसके मोबाइल पर मैसेज भी आए, लेकिन अंगे्रजी पढ़ नहीं पाने से वह समझ नहीं पाया।
इसके बाद 7 अक्टूबर को फिर से ओटीपी नम्बर के लिए फोन आया, नम्बर बताने पर फिर से दस हजार रुपए पार हो गए। नो अक्टूबर को तीन बार में 49,997 रुपए पार हो गए।
दस अक्टूबर को दो बार में 39 हजार 998 रुपए कम हो गए। इस प्रकार असलम के खाते से एक लाख 58 हजार 991 रुपए पार हो गए। असलम ने इस बारे में बैंक में शिकायत की।
बैंक मैनेजर ने असलम को जब बैंक की ओर से फोन नहीं किए जाने के बारे में बताया तो उसके होश उड़ गए। बैंक मैनेजर के कहने पर उसने लिखित में शिकायत दी है।
नहीं हुई खरीद शुरू
टोंक. जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द व मूंगफली की खरीद शुरू नहीं हो पाई। राजफैड ने अभी तक किसानों को खरीद के लिए टोकन जारी नहीं किए हंैै। जानकारी अनुसार जिले के नो केन्द्रों पर समर्थन मूल्य पर उड़द-मूंग व मूंगफली की खरीद शुरू करनी थी।
कुछ केन्द्रों पर इसके लिए क्रय-विक्रय सहकारी समिति की ओर से खरीद के लिए तोल-माप के उपकरण भी लेकर पहुंच गए, लेकिन दोपहर तक किसी भी किसान के नहीं आने पर राजफैड से सम्पर्क करने पर पता चला की गुरुवार को खरीद के लिए टोकन ही जारी नहीं किए गए।
इस संबंध में क्रय-विक्रय सहकारी समिति मैनेजर शीतल तर्क ने बताया कि तीन से पांच अक्टूबर तक किसानों ने खरीद किए जाने को लेकर रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन अभी तक टोकन जारी नहीं होने से खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
किसानों की कटेगी जेब: जिले में मुख्य रूप से मूंगफली का उत्पादन निवाई व पीपलू क्षेत्र में होता है। जबकि मूंगफली का समर्थन मूल्य पर खरीद केन्द्र टोंक को बनाया गया है। ऐसे में निवाई व पीपलू क्षेत्र के किसानों को मंूगफली की फसल बेचने के लिए टोंक आना पड़ेगा।