लखनऊ

टेल तक कैसे पहुंचेगा नीर? कचरे से अटी पड़ी नहरें

टोंक/ राजमहल. बीसलपुर बांध की दायीं व बायीं नहरों में पानी छोडऩे में हो रही देरी फसलों के लिए भारी पडऩे लगी है। जबकि जिले के अन्य बांधों की नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है या फिर पानी का प्रवाह छोडऩे की तिथि तय की जा चुकी है।

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Nov 03, 2016
टोंक. क्षतिग्रस्त पड़ी डारडाहिन्द वितरिका व राजमहल क्षेत्र के पास खेत में बोई गई सरसों की फसल।

टोंक/ राजमहल. बीसलपुर बांध की दायीं व बायीं नहरों में पानी छोडऩे में हो रही देरी फसलों के लिए भारी पडऩे लगी है।

जबकि जिले के अन्य बांधों की नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है या फिर पानी का प्रवाह छोडऩे की तिथि तय की जा चुकी है।

इसके बावजूद बीसलपुर बांध की नहरों में पानी छोडऩे की तिथि तक तय नहीं हो सकी। इसको लेकर किसान आशंकित है।

जब गत वर्ष 14 अक्टूबर को नहरों में पानी छोड़ दिया गया था।

किसानों का मानना है कि देरी से पानी छोडऩे पर टेल तक पानी पहुंचाने को लेकर परियोजना अभियन्ताओं को मशक्कत करनी पड़ सकती है।

बीसलपुर बांध की नहरों के कमाण्ड क्षेत्र में पडऩे वाले किसानों को सरसों व गेहूं की फसल को लेकर सिंचाई की आवश्यकता सताने लगी है।

इधर, नवम्बर शुरू होने के बावजूद अभी तक दोनों मुख्य नहरों सहित वितरिकाओं की सफाई व मरम्मत का कार्य अधूूरा पड़ा है।

बोटून्दा गांव के किसान रामनारायण शर्मा, सत्यनारायण गुर्जर, जगदीश शर्मा आदि किसानों ने बताया कि बारिश की नमी में बोई गई सरसों के अंकुरित बीज को इन दिनों सिंचाई की आवश्यकता पडऩे लगी है।

वहीं गेहूं की बुवाई के लिए किए जाने वाले पळाव के लिए किसानों को पानी का इंतजार है। पानी के अभाव में गेहूं की बुवाई में भी देरी हो रही है।

मेहंदवास के श्योराज यादव, रामलखन आदि का कहना है कि अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह तक सरसों व नवम्बर के प्रथम सप्ताह में गेहूं की बुवाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है।

Published on:
03 Nov 2016 09:43 am
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