टोंक

video: यहां छात्राओं के साथ हो रहा था ऐसा जिसे देख व सून एसडीएम भी रह गए दंग, अल्पसंख्यक कन्या अवासीय छात्रावास का है मामला

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते उन्हें रो-रोकर यहां दिन गुजारने पड़ रहे हैं। लेकिन हालात के आगे घुटने टेकने पड़ रहे हैं।

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Dec 22, 2017
शहर के छावनी क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रावास में जानकारी लेते एसडीएम

टोंक. महिलाओं व बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने समेत आजादी देने के लिए सरकारें भले ही कार्य कर रही हो, लेकिन टोंक शहर में महिलाओं व बेटियों के हालात दयनीय हैं। आजादी छोड़ वे सुरक्षित भी नहीं है। शहर के छावनी क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की छात्राओं के लिए संचालित छात्रावास में चल रही हरकतें तो मानवता को शर्मसार करनी वाली हैं।


जबकि जिले की पुलिस अधीक्षक व नगर परिषद सभापति समेत अन्य पदों पर महिलाएं काबिज हैं। इसके बावजूद महिलाओं के हालात बदतर हैं। ये खुलासा गुरुवार सुबह उपखण्ड अधिकारी प्रभातीलाल जाट के छात्रावास का निरीक्षण करने के दौरान हुआ। छात्राओं की बातें सुनकर वे हतप्रभ रह गए।

छात्राओं के कक्ष में देर रात शराब के नशे में पुरुष अद्र्धनग्न घुस जाते हैं। वे उनके पलंग पर भी बैठ जाते हैं। कुछ कहने पर छात्रावास से निकाले जाने की धमकी दी जाती है। उपखण्ड अधिकारी ने संचालक समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट जिला कलक्टर को दी है। उन्होंने बताया कि ये छात्रावास छावनी में प्रेरणा एजुकेशन सोसायटी संचालित करती है। छात्राएं कक्षा दस से लेकर स्नातक स्तर तक की पढ़ाई कर रही है।


50 में से मिली 13
जयपुर रोड छावनी स्थित प्रेरणा एजुकेशन सोसायटी का छात्रावास किराए के भवन में संचालित है। इसमें नामांकन तो 50 छात्राओं का है, लेकिन निरीक्षण के दौरान 13 छात्राएं ही मिली। दो कर्मचारी भी नदारद मिले। प्रत्येक शयन कक्ष के लिए स्वीकृत दो के स्थान पर पांच पलंग मिले। कमरा नम्बर पांच में दो छात्राएं सर्दी में भी फर्श पर सोती मिली। छात्रावास में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिली।

प्रशासन की अंधेरगर्दी
जिले के आला अधिकारी व जनप्रतिनिधि अधिकतर कार्यक्रम तथा बैठकों में महिलाओं को लेकर बड़ी बातें करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इस छात्रावास की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया।

जबकि इसकी तीन रिपोर्ट अल्पसंख्यक मामलात विभाग उच्चाधिकारियों को दे चुका है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से छात्रवास की अव्यवस्थाओं की रिपोर्ट गत 31 अक्टूबर, 20 नवम्बर तथा 20 दिसम्बर को दी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।

भरपेट खाना भी नहीं
नियमों के अनुसार तय समय पर छात्राओं को नाश्ता तथा भोजन उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन छात्रावास में उन्हें नाश्ता तो दिया ही नहीं जाता। भोजन इतना ही मिलता है, जिससे पेट नहीं भरता। चौंकाने वाली बात ये है कि पावभर दूध में छात्राओं की चाय बनाई जाती है।

एक चम्मच तेल में ही दर्जनों छात्राओं के लिए सब्जी बनाई जाती है। तीन महीने में एक बार नहाने के लिए 10 रुपए का साबुन दिया जाता है। पलंग की चादर भी छात्राएं ही धोती है। बालों का तेल पूरे सत्र में एक बार ही उपलब्ध कराया जाता है।


ज्यादा खाती है तो मिर्च तेज करो
छात्राओं ने बताया कि छात्रावास कार्मिक अभद्रता करते हैं। कहते हैं कि एक चम्मच तेल में ही सब्जी बनाई जाए। छात्राएं ज्यादा खाती है तो सब्जी में मिर्च ज्यादा कर दो। निरीक्षण में पाया कि छात्रावास में कोई व्यवस्था नहीं है। कक्षों का अभाव है। कार्मिकों का व्यवहार ठीक नहीं है।


सुनसान सडक़ पर भीगती रही
स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा ने बताया कि वह गत 24 अगस्त की शाम साढ़े पांच छात्रावास आई थी। देरी से आने पर कार्मिकों ने रात साढ़े 9 बजे उसे बरसात के बीच छात्रावास से निकाल दिया। रात के समय वह काफी देर तक सुनसान सडक़ पर भीगती रही। बाद में वह किसी परिचित के घर गई।


बिजली भी चोरी की
निरीक्षण में पाया कि छात्रावास में बिजली चोरी की जा रही है। एसडीओ ने विद्युत वितरण निगम के कनिष्ठ अभियंता को निर्देश देकर कार्रवाई कराई। इसके तहत बिजली के तार काट दिए गए। बाद में छात्राओं की सुविधाओं को देखते हुए बिजली की व्यवस्था की गई।

मजबूरी में रहती हैं छात्राएं
अधिकतर ग्रामीण परिवेश की छात्राएं मजबूरी में यहां रहती है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते उन्हें रो-रोकर यहां दिन गुजारने पड़ रहे हैं। छात्रावास के हालात बयान कर छात्राएं रो पड़ी। घर की स्थिति मजबूत होती तो वे किराए का कमरा लेकर रहती, लेकिन हालात के आगे घुटने टेकने पड़ रहे हैं।

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Published on:
22 Dec 2017 07:43 am
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