बदहाल व्यवस्था के बीच मरीजों के आंसू पौंछने वाला कोई नहीं है। वैकल्पिक चिकित्सक महज परामर्श दे रहे हैं।
टोंक. छह दिन बाद भी सरकार व चिकित्सकों के अडियल रवैये के चलते अस्पतालों में वार्ड से लेकर आउटडोर तक सन्नाटा पसरा रहा। आयुष व आयुर्वेद के सहारे चिकित्सा सेवा बहाल करने का दावा करने वाली सरकार चैन में है। दूसरी ओर मरीजों के मुंह से आह निकल रही है।
बदहाल व्यवस्था के बीच मरीजों के आंसू पौंछने वाला कोई नहीं है। वैकल्पिक चिकित्सक महज परामर्श दे रहे हैं। जटिल ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। शिशु, प्रसूता, मेडिकल, आईसीयू आदि वार्डों में सन्नाटा पसरा है।
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद गुरुवार को भी कोई चिकित्सक काम पर नहीं लौटा। दूसरी ओर इण्डियन मेडिकल एसोसिएसन से जुड़े जिले के चिकित्सकों ने भी गुरुवार को विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर कार्य किया।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजेन्द्र त्रिपाठी व जिला सचिव डॉ. राजेश मालपानी ने बताया कि सरकार को चिकित्सकों की मांगों का जल्द निराकरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से प्रतिदिन सुबह से 8 से 10 बजे तक कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बावजूद मांगे नहीं मानी गई तो 25 दिसम्बर को दिनभर निजी अस्पताल बंद रखे जाएंगे।
जनप्रतिनिधि भी नहीं ले रहे सुध
गांव से लेकर शहर तक मरीजों को पूरा उपचार नहीं मिल पा रहा। आयुर्वेद व आयुष चिकित्सक मरीजों को परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन वे आयुर्वेदिक दवा ही लिख रहे हैं। आयुर्वेदिक दवा का अभाव होने से मरीज निराश लौट रहे हैं। दूसरी ओर इस बार जनप्रतिनिधि भी मरीजों की सुध नहीं ले रहे हैं। जबकि पिछली बार कई जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों की पीड़ा सुनी थी व व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
ये हंै मांगे
चिकित्सक 33 सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग करते आ रहे है। इनमें एकल पारी में चिकित्सालय, चिकित्सकों को सुरक्षा देने, समयबद्ध पदोन्नति, मेडिकल सर्विस कैडर बनाने आदि प्रमुख मांगें शामिल हैं। इन मांगों को लेकर गत दिनों सरकार से समझौता भी हुआ था।
मांगों की क्रियान्विति नहीं होने से 18 दिसम्बर से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद प्रदेशभर में रेस्मा लगाने व चिकित्सकों की गिरफ्तारियों के विरोध में 16 दिसम्बर से ही चिकित्सक भूमिगत हो गए। इससे पहले भी विरोध स्वरूप अस्पताल परिसर में टैंट में मरीजों को परामर्श दे रहे थे।