
टोंक. जिले की सभी नगर निकाय तथा ग्राम पंचायतें ओडीएफ घोषित होने के लिए दौड़ में जुटी है, लेकिन ये दौड़ कागजों तक ही सीमित है। स्वच्छ भारत के तहत कई कार्य होने हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी महज शौचालय निर्माण को ही ओडीएफ मान रहे हैं।
जबकि ओडीएफ में स्वच्छता के सभी घटक पूरे करने होते हैं। जिलेभर में शौचालय निर्माण के लिए अधिकारी व जनप्रतिनिधि युद्ध स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनकी निगाह महज घरों में बनने वाले शौचालयों पर है। स्वच्छता के अन्य मायने दरकिनार कर रहे हैं।
गंदगी ऐसी कि निकलना मुश्किल
गंदगी से जिले के शहर व कस्बे भी अछूते नहीं है। जगह-जगह फैला कचरा व कीचड़ सफाई अभियान की पोल खोल रहा है। गांवों के हालात ज्यादा बदतर हैं। निवाई विधानसभा क्षेत्र तथा पीपलू उपखण्ड की ग्राम पंचायत कठमाणा गंदगी से अटी है।
इस गांव में अधिकतर स्थानों पर सडक़ बने ही एक दशक से अधिक का समय गुजर गया। इस दशक में मरम्मत पर भी ध्यान नहीं दिया गया। गौरव पथ भी समस्या का निराकरण नहीं कर सका। इससे ये गांव कीचड़ से अटा है।
नालियां ही नहीं बनाई: गांवों में कभी कभार कोई सडक़ बना दी जाती है, लेकिन नालियां नहीं बनवाई जाती। ऐसे में घरों से निकलने वाले पानी का निकास नहीं हो पाता। पानी रास्ते पर जमा होकर कीचड़ का रूप ले लेता है। पीपलू के कठमाणा गांव के मुख्य मार्ग पर ये कीचड़ करीब आधा किलोमीटर तक फैला हुआ है।
ये कैसा अभियान
जिला कलक्टर से लेकर गांव के सचिव, सांसद, विधायक से लेकर वार्ड पंच तक हर घर को शौचालय युक्त बनाने में जुटे हैं। महज आंकड़े पूरे करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। चाहे इसके लिए लोगों की सुविधाएं ही क्यों ना बंद करनी पड़ जाए। कई गांवों तथा कस्बों में तो सुविधाएं बंद भी कर दी गई।
इस अभियान के तहत महज शौचालय बनाना ही नहीं है। सम्पूर्ण गांव व वार्ड पूर्ण रूप से स्वच्छ होना है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। निरीक्षण के दौरान भी महज शौचालय ही देखे जाते हैं। उसके आस-पास फैली गंदगी पर किसी की नजर नहीं है।
गांवों के घरों में शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन उन तक पहुंचने के लिए स्वच्छ रास्ता नहीं बनाया गया। गांवों में बने ग्राम पथ भी कुछ दूरी तक ही है। बाकी की कच्ची सडक़ कीचड़ से अटी हुई है।
जल्द ही करेंगे
स्वच्छ भारत मिशन लोगों की जागरूकता से सफल होगा। जागरूकता में कुछ कमी है। पूरी कोशिश करने के बाद भी लोग इसे समझ नहीं रहे हैं कि शौचालय उनके लिए है। जागरूकता लाने में कुछ समय लगेगा। गांवों में विकास कार्य भी जल्द कराए जाएंगे।
ओमप्रकाश जांगिड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद टोंक।