
राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की सुगबुगाहट के बीच प्रशासनिक फेरबदल और परिसीमन (Delimitation) के फैसलों को लेकर ग्रामीण इलाकों में विरोध के सुर फूटने लगे हैं। टोंक जिले के मालपुरा उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बीडगनवर गांव के ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत परिसीमन के तहत बीडगनवर को पुरानी ग्राम पंचायत गनवर से हटाकर कछौलिया पंचायत में शामिल किए जाने के फैसले से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। अपनी इस नाराजगी को दर्ज कराते हुए ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन सौंपा और साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे आगामी पंचायत चुनाव में सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि जब से ग्राम पंचायत गनवर का गठन हुआ था, तब से बीडगनवर के मतदाता इसी पंचायत से जुड़े चले आ रहे थे। भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से भी गनवर गांव बीडगनवर के बेहद करीब है। आंकड़ों के मुताबिक, बीडगनवर से गनवर पंचायत मुख्यालय की दूरी महज दो किलोमीटर के आसपास है, जबकि उपखंड मुख्यालय करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित है। इस गांव में 600 से अधिक मतदाता हैं, जिनका रोजमर्रा का सामाजिक, आर्थिक और दैनिक आवागमन का जुड़ाव हमेशा से गनवर के साथ ही रहा है।
जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने कछौलिया पंचायत में जोड़े जाने के व्यावहारिक और भौगोलिक नुकसान का भी खुलकर जिक्र किया है। ग्रामीणों ने बताया कि नए परिसीमन के बाद बीडगनवर को कछौलिया पंचायत के अधीन कर दिया गया है, जबकि कछौलिया यहां से करीब सात किलोमीटर दूर है और उपखंड मुख्यालय की दूरी भी बढ़कर लगभग 20 किलोमीटर हो जाती है।
ग्रामीणों का मुख्य तर्क यह है कि पंचायत संबंधी छोटे-बड़े सरकारी कामकाज के लिए अब उन्हें लंबी और कठिन दूरी तय करनी पड़ेगी। इसके अलावा, सबसे बड़ी चिंता का विषय आवागमन का रास्ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कछौलिया जाने वाले मार्ग के बीच में करीब सात किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह से जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में विशेषकर रात के समय इस रास्ते से गुजरने पर सुरक्षा को लेकर हमेशा एक गंभीर असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
ग्रामीणों ने अपने पक्ष को रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि बीडगनवर सेटलमेंट के शुरुआती दौर से ही एक राजस्व ग्राम के रूप में दर्ज चला आ रहा है। गांव के अधिकांश किसानों की कृषि भूमि और अन्य सभी प्रकार के राजस्व व भू-अभिलेख से जुड़े कार्य पटवार क्षेत्र गनवर के अंतर्गत ही आते हैं।
शिक्षा के लिहाज से भी बच्चों का जुड़ाव गनवर से ही है, क्योंकि गांव के छात्र-छात्राएं नजदीक ही स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गनवर में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि जब उनका सामाजिक, राजस्व और शैक्षणिक ताना-बाना पूरी तरह गनवर से जुड़ा हुआ है, तो ऐसे में उन्हें प्रशासनिक रूप से कछौलिया पंचायत के अधीन करना पूरी तरह से अव्यवहारिक और जनहित के खिलाफ है।
ग्रामीणों ने बताया कि जब पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया चल रही थी, तभी उन्होंने जिला प्रशासन के समक्ष इस बदलाव का पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर निर्णय में कोई संशोधन नहीं किए जाने के कारण ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।
इस संबंध में गांव में एक बड़ी पंचायत और बैठक आयोजित की गई, जिसमें बाबूलाल बैरवा, बनवारी लाल, मोहन लाल, मोती लाल, राजू और रामप्रसाद सहित तमाम प्रमुख ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया है कि यदि उनकी इस वाजिब मांग को नहीं माना गया और बीडगनवर को वापस गनवर पंचायत में शामिल नहीं किया गया, तो वे आगामी पंचायत राज चुनावों में पूरी तरह से मतदान का बहिष्कार करेंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस चेतावनी के बाद परिसीमन के इस मामले में क्या कदम उठाता है।