दुष्कर्म के चार माह बाद अचानक नाबालिग के पेट में दर्द शुरू होने लगा।
विजय जैन/ मधुसूदन गौतम
-आंखों में रह गए सिर्फ आंसू
-जुलाई के प्रथम सप्ताह में होगी डिलीवरी
-रोते-रोते पथरा गई दुष्कर्म पीडि़ता की आंखे
-नाबालिग को नहीं मिली कोई मदद
टोंक. बंथली. जिन आंखों को सपने देखने थे उन आंखों के आंसू घंटों बहकर सूख गए हैं और वक्त जैसे थम सा गया है। इंतजार है तो ज्यादती के बाद एक नए जीवन को जन्म देने का और विवशता है किसी भी तरह उसे दुनिया में लाने की।
यह पीड़ा है टोंक जिले के घाड़ थाना क्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म की शिकार सत्रह वर्षीय नाबालिग की। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया, लेकिन सरकारी संस्थाओं ने अभी तक पीडि़ता की सुध नहीं ली है।
दुष्कर्म के चार माह बाद अचानक नाबालिग के पेट में दर्द शुरू होने लगा। पहले तो साधारण मानकर परिजन टाल गए। दर्द कम नहीं होने पर उसे चिकित्सक को दिखाया तो गर्भवती होने का पता चला।
परिजनों ने 28 अप्रेल 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई। जब तक पीडि़ता को गर्भवती हुए छह माह हो चुके थे। पुलिस ने आरोपी जलसीना निवासी प्रेमलाल माली, सेठी मीणा व सुरेन्द्र मीणा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।
भाई की हत्या की दे गए थे धमकी
घर में दुकान पर आरोपियों का आना-जाना था। एक दिन घर में अकेली देखकर तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर भाई को जान से मार देने की धमकी दे गए। घटना से घबराई पीडि़ता ने किसी को आपबीती नहीं बताई।
तबीयत खराब होने लगी तो चिकित्सक को दिखाया तो गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इस पर पहले तो परिजनों ने अपने स्तर पर गर्भपात कराने का प्रयास किया, ऐसा नहीं होने पर मामला दर्ज कराया, जब तक गर्भ ठहरे छह माह हो चुके थे। अगले माह के प्रथम सप्ताह तक नवजात के जन्म लेने की संभावना है।
कोई नहीं आया आगे
दूसरी ओर मामला दर्ज होने के बाद से अब तक कोई महिला संगठन या प्रशासनिक अधिकारी पीडि़ता की सम्भाल लेने नहीं आए। इधर, परिजनों का कहना है कि अब गांव में कोई रोजगार नहीं दे रहा है। ऐसे में परिवार गुजारा चलाने के लिए पीडि़ता के पिता को जयपुर में मजदूरी करनी पड़ रही है।
पीडि़ता व परिजनों की ओर से मुख्यमंत्री की राजस्थान पीडि़त प्रतिकर स्कीम के तहत गत माह भरण-पोषण के लिए पांच लाख रुपए दिए जाने व मासिक सहायता राशि के लिए आवेदन किया था।विभाग से जांच आने पर पीडि़ता के सारे दस्तावेज लेकर कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है, जिसे वापस जल्दी ही विभाग को कार्रवाई के लिए भेज देंगे।
राजेन्द्र प्रसाद शर्मा, प्रभारी सरोली पुलिस चौकी, थाना घाड़
बालिका से निरन्तर सम्पर्क हंै। मामला दर्ज होने के बाद पीडि़ता को चिकित्सा सुविधा भी मुहैया करवाई गई थी। उसके प्रार्थना पत्र के बाद ही उसकी मां के साथ घर भेजा गया था। सहायता राशि के प्रयास जारी है।
रवि शर्मा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, टोंक
टोंक की चाइल्ड वैलफेयर कमेटी को पीडि़ता के सम्पर्क में रह कर उसकी सहायता करनी चाहिए थी। अब तक ऐसा क्यों नहीं हो पाया। इसका पता किया जाएगा। जानकारी कर जल्द सहायता की जाएगी।
मनन चतुर्वेदी, अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग, राजस्थान