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Muskmelon farming: ढाई बीघा जमीन में खरबूजे की खेती, महज 3 महीने में 7-8 लाख रुपए तक की आमदनी

Muskmelon cultivation: किसान रमेश माली ने मात्र ढाई बीघा जमीन में खरबूजे की खेती कर महज तीन महीने में 7 से 8 लाख रुपए तक की आमदनी हासिल की है।

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टोंक

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Anil Prajapat

Apr 29, 2026

Melon farming

खरबूजे की खेती व इनसेट में किसान रमेश। फोटो: पत्रिका

टोंक। उनियारा क्षेत्र के महमूद नगर गांव के किसान रमेश माली ने मेहनत और नवाचार के दम पर खेती में सफलता की मिसाल पेश की है। उन्हाने मात्र ढाई बीघा जमीन में खरबूजे की खेती कर महज तीन महीने में 7 से 8 लाख रुपए तक की आमदनी हासिल की है।

रमेश माली के खरबूजों की मिठास इतनी प्रसिद्ध है कि उनके खेत की फसल जैसे ही उनियारा सब्जी मंडी में पहुंचती है, खरीदारों की भीड़ लग जाती है। लोग उनके खरबूजे खरीदने के लिए इंतजार करते नजर आते हैं।

ड्रिप सिंचाई पद्धति से फसल में लगातार सुधार

रमेश बताते हैं कि करीब 5-7 साल पहले उन्होंने एक अन्य किसान को खरबूजे की खेती करते देखा, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया। शुरुआती दौर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाने के बाद उनकी फसल में लगातार सुधार हुआ।

2 साल से हो रही अच्छी आमदनी

पिछले दो वर्षों से वे इस फसल से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। वे प्रतिदिन करीब 40 कैरेट (थैलियां) खरबूजे तोड़कर मंडी में बेचने लाते हैं। प्रत्येक कैरेट में लगभग 25 किलो खरबूजे होते हैं। उनकी फसल की मिठास इतनी खास है कि एक बार खाने वाला ग्राहक दोबारा खरीदने के लिए खुद पहुंच जाता है।

खरबूजे के साथ-साथ टमाटर, मिर्ची भी उगाते हैं

रमेश माली खरबूजे के साथ-साथ आधा-आधा बीघा में टमाटर, मिर्ची और अन्य सब्जियां भी उगाते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय होती है। रमेश के अनुसार, फसल तैयार करने में कुल लागत का करीब 30 से 40 प्रतिशत खर्च आता है। इसके बावजूद वे पूरी लगन से खेती करते हुए अपने काम को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही वो अपने क्षेत्र के किसानों को भी खरबूजे की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे है, ताकि वे भी कम समय में अधिक मुनाफा कमा सके।

सरकारी योजनाओं से नाराजगी

सरकारी योजनाओं के लाभ पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार कृषि विभाग के अधिकारियों ने जानकारी ली और फॉर्म भी भरवाए, लेकिन उन्हें किसी योजना का लाभ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि लाभदेने के नाम पर उनसे लेनदेन की मांग की गई, जिसके कारण उन्होंने योजनाओं से दूरी बना ली।