
आवां. सुदर्शनोदय अतिशय क्षेत्र पर मुनि सुधासागर के ससंघ चातुर्मास करने से क्षेत्र में भक्ति रस का संचार हो रहा है। आवां स्थित इस अतिशय क्षेत्र पर इनके साथ मुनि महासागर, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गम्भीर सागर के धर्म ज्ञान की पावन सरिता बह रही है।
इनके सान्निध्य में हो रहे भगवान के अभिषेक, शान्तिधारा, प्रवचन व जिज्ञासा समाधान में उमड़े श्रद्धालु भक्ति में झूम रहे हैं। संजय छाबड़ा,चौथमल धानोत्या, कैलाश जैन, श्रवण कोठारी,भागचन्द गोयल, जम्बू हरसोरा, कौशल जैन, अशोक धानोत्या, कमलेश जैन,नोरत कुमार बोरखण्डिया आदि ने बताया कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालु भाव-विभोर हैं।
मुनि ने सफलता के सूत्र बताए
जीवन में सफलता कैसे मिल सकती है? इसके सूत्र कौनसे हैं? अतीत ही नहीं वर्तमान में किए कर्म भी जीवन की दिशा व दशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैंं। मुनि पुंगव सुधासागर ने यंत्र, मंत्र और तंत्र की शक्तियों से अभिभूत कराया।
इस दौरान मुनि सुधासागर ने आचार्य शिरोमणी विद्यासागर का उदाहरण देते हुए साधु जीवन के त्याग, तपस्या और समर्पण के भावपूर्ण दृष्टान्त सुनाए। उन्होंने कहा कि भगवान से निहित स्वार्थ की वस्तुओं के स्थान पर उनकी असीम कृपा मांगनी चाहिए।
मांगना चाहिए कि मैं मन, वचन और कर्म से निर्मल और पावन हो जाऊं। मेरी साधना ऐसी हो कि राह का हर कांटा फूल बन जाए। इससे जीवन परिपूर्ण हो जाएगा। इसके लिए राग-द्वेष उत्पन्न करने वाले निमित्त को ही जीवन से हटाना चाहिए। निमित्त उपादान से कमजोर होने के कारण अभी कुछ नहीं कर पाएगा, लेकिन भविष्य के लिएआंसू दिलाने वाला होता है।
कर्मों का फल भोगना पड़ता है
बनेठा. कस्बे में मंगलवार को गोपालजी के मंदिर परिसर में भागवत कथा के संगीतमय प्रवचन के दौरान पण्डित कैलाश चन्द्र तेहरिया ने कहा कि भागवत कथा श्रवण मात्र से ही पापों एवं दु:खों से मुक्ति मिलती है। पण्डित तेहरिया ने कहा कि मनुष्य को कर्मो का फल सबको भोगना पड़ता है।
अच्छे एवं बुरे कर्मो का फल मनुष्य को यहां ही मिलता है। भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की कला को सिखाती है तथा मनुष्य अच्छे व बुरे कर्मो के भेद सिखाती है।
वहीं श्रद्धालुओं की ओर से भागवत पुराण की शोभा एवं कलश यात्रा निकाली, जो कल्याणजी मंदिर से रवाना हुई। कलश यात्रा गोपालजी मंदिर परिसर पहुंची। जहां कलशों को स्थापित कर पण्डित कैलाश तेहरिया ने भगवान एवं भागवत पुराण की पूजा-अर्चना कर कथा की शुरुआत की।
गुरु बिना ज्ञान नहीं
निवाई . घाटा करीरिया श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा सन्यास आश्रम में संत भजनानन्द गिरी का प्रथम निर्वाण महोत्सव संत कर्मानन्दगिरी के सान्निध्य मे धूमधाम से मनाया गया। संत कर्मानन्द गिरी ने कहा कि गुरु बिना ज्ञान नहीं है।
ज्ञान के बिना मनुष्य अधूरा है। श्रद्धालु मोहरसिंह कुंडेर एवं नेहनूलाल गुर्जर ने बताया कि निर्वाण महोत्सव संत कर्मानन्दगिरी के सान्निध्य में मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान संत बिरजानन्द गिरी, गोविन्द हांकला, रूपसिंह, नादान गुर्जर, कजोड़मल पोषवाल, सरपंच तेजवीर जाट आदि थे।