
टोंक. बाड़मेर में सप्ताहभर पहले रोडवेज में लगी आग ने दो यात्रियों की जिंदगी लील ली। इसके बावजूद आगार अधिकारी नहीं चेत रहे। आलम यह है कि टोंक आगार की महज पच्चीस फीसदी रोडवेज में ही अग्निशमन यंत्र लगे हैं। जबकि अधिकतर में इनका अभाव है। ऐसे में छोटी सी चिंगारी यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है।
चौकाने वाली बात है कि टोंक आगार के बेड़े में शामिल 108 बसों में से महज 30 बसों में ही ये यंत्र लगे हैं। अधिकतर बसें बिना यंत्रों के ही विभिन्न मार्गों पर दौड़ रही हैं। रोडवेज अधिकारी भी इस बात से वाकिफ हैं। दो वर्ष पहले बस स्टैण्ड पर एक बस में आग लगने की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे है।
टोंक आगार के बेड़े में शामिल 108 बसें जिले समेत प्रदेश के विभिन्न मार्गों पर संचालित हैं। इनमें कई ग्रामीण बसें भी शामिल हैं। बसों में सवार यात्री मनाही के बावजूद ज्वलनशील पदार्थ चोरी-छिपे रोडवेज में लाते- ले जाते हैं। ध्रूमपान भी करते हैं। ऐसे में इनसे उठी छोटी सी चिंगारी यात्रियों को नुकसान पहंचा सकती है। इससे रोडवेज के सुरक्षित यात्रा के दावों के बीच यात्री अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रशिक्षण भी नहीं
प्रदेश के सभी आगारों में लगे चालक व परिचालकों को आग से निपटने का कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता। जबकि लाइसेंस बनाने के साथ ही चालक व परिचालकों को आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है।
प्रतिदिन का लक्ष्य
आगार की 108 बसें प्रतिदिन 30 से 32 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। इसमें विभिन्न मार्गों के 97 शिड्यूल शामिल हैं। ऐसे में आगार की बस में सवार यात्री आग की घटनाओं को लेकर चिंतित रहते हंैं।
आंकड़ों की जुबानी
52 डिपो हैं प्रदेश में
4700 रोडवेज बसें
9लाख औसतन यात्री
108 टोंक की बसें
कोई आदेश नहीं
बेड़े में शामिल नई व लम्बी दूरी पर संचालित
बसों में तो अग्निशमन यंत्र की सुविधा है। जबकि पुरानी बसों में इसका अभाव है। पुरानी में ऐसे यंत्र लगाने के कोई आदेश भी नहीं है।
रामचरण गौचर, मुख्य आगार प्रबन्धक टोंक।
हर वाहन में होना जरूरी
डक़ पर दौड़ रहे प्रत्येक वाहन में अग्निशमन यंत्र का होना जरूरी है। कानून भी यही कहता है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए ऐसे इंतजाम आवश्यक है।
आर. के. चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी टोंक।