नगर परिषद में अंधेरगर्दी का आलम इस कदर है कि नामांतकरण खुलने से पहले ही विज्ञान नगर कॉलोनी को एप्रुव्ड कर दिया। अनदेखी एवं राजनीतिक दबाव के चलते नगर परिषद के अधिकारियों ने दस्तावेज तक नहीं देखे। वहीं शहर से दूर खेतों में सडक़ समेत सुविधाएं उपलब्ध करा दी।
नगर परिषद में अंधेरगर्दी का आलम इस कदर है कि नामांतकरण खुलने से पहले ही विज्ञान नगर कॉलोनी को एप्रुव्ड कर दिया। अनदेखी एवं राजनीतिक दबाव के चलते नगर परिषद के अधिकारियों ने दस्तावेज तक नहीं देखे। वहीं शहर से दूर खेतों में सडक़ समेत सुविधाएं उपलब्ध करा दी। जबकि शहर की घनी आबादी सुविधाओं को तरस रही है। जबकि नियमानुसार पहले नगर परिषद के नाम नामांतकरण खुलना चाहिए और कॉलोनी में मास्टर प्लान के तहत सभी सुविधाएं कॉलोनाइजर की तरफ से कराई जानी चाहिए। लेकिन डाइट रोड की इस कॉलोनी में ऐसा देखा तक नहीं गया। यह तो एक बानगी है।
अन्य कॉलोनियों की भी जांच हो तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं। वहीं खेतों में सडक़ बनाने के मामले में महज नोटिस देकर ही खानापूर्ति की गई है। जबकि गलत रिपोर्ट पेश करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
एक्सपर्ट बोले...जारी नहीं हो सकते पट्टे
प्रोपर्टी एक्सपर्ट लोकेश कुमार के अनुसार बिना नामांतकरण खुले एप्रुव्ड कॉलोनी में नियमानुसार पट्टे नहीं बनाए जा सकते। पहले लेआउट-प्लान को स्वीकृत कराने के बाद वहां सुविधा देखी जाती और फिर नामांतकरण खोला जाता। लेकिन शहर की कॉलोनियों में ऐसा नहीं किया गया।
इधर, 34 साल से पट्टाशुदा मकान, फिर भी नहीं सडक़
शहर की कई कॉलोनियां ऐसी है, जहां लोग 30 से 40 साल से रह रहे हैं। इनके नगर परिषद ने पट्टे भी जारी किए हैं। लेकिन अभी तक वहां सडक़ तक नहीं बनी है। ऐसा ही मामला सवाईमाधोपुर रोड सरदार नगर का है। जहां के निवासी मोहम्मद फुरकान ने बतायाकि यहां लोग 1990 से पहले से निवास कर रहे हैं। सभी के पट्टे भी बने हुए हैं। लेकिन सड$क बनवाने के लिए नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है।
यह बोली आयुक्त
यह कॉलोनी 2013 में एप्रुव्ड हुई है। इसके दस्तावेज देखने होंगे। इसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एक्सईएन समेत अन्य को नोटिस दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
मामता नागर, आयुक्त, नगर परिषद, टोंक