टोंक

ब्रह्माणी नदी से जुड़ा होता बीसलपुर बांध तो जिले के 80 गांवों को सिंचाई में मिलता फायदा

बीसलपुर बांध का पानी क्षेत्रवासियों के लिए न केवल समस्या, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए मुद्दा बना रहता है। प्रदेश की वृहद्ध परियोजना में निर्मित बीसलपुर बांध यदि ब्रह्माणी नदी से जुड़ा होता तो, आज क्षेत्रवासियों की लम्बित प्रत्येक समस्या का हल हो जाता।  
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Jan 11, 2023
ब्रह्माणी नदी से जुड़ा होता बीसलपुर बांध तो जिले के 80 गांवों को सिंचाई में मिलता फायदा
ब्रह्माणी नदी से जुड़ा होता बीसलपुर बांध तो जिले के 80 गांवों को सिंचाई में मिलता फायदा

टोडारायसिंह. बीसलपुर बांध के ओवरफ्लो होने के बाद उसके पानी को टोरडी सागर, घारेड़ा सागर व चांदसेन के बांध में डायवर्जन की मांग लम्ब से समय से लंबित चल रही है। गत दिनों भी किसानों ने इस मामले को लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा था। किसानों की मानें तो हर चुनाव में ये मुद्दा उठता है, लेकिन चुनाव के बाद ये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

आज स्थिति यह है कि बीसलपुर बांध का पानी क्षेत्रवासियों के लिए न केवल समस्या, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए मुद्दा बना रहता है। प्रदेश की वृहद्ध परियोजना में निर्मित बीसलपुर बांध यदि ब्रह्माणी नदी से जुड़ा होता तो, आज क्षेत्रवासियों की लम्बित प्रत्येक समस्या का हल हो जाता।


क्या है मामला: टोंक जिले में निर्मित बीसलपुर बांध से जिलेवासियों को पेयजल के साथ सिंचाई की उम्मीद थी। इसके आरक्षित पानी के अलावा बीसलपुर बांध के ओवरफ्लो पानी को टोरडी सागर, घारेड़ा सागर व चांदसेन के बांध में डलवाने की मांग किसान काफी समय से कर रहे हैं।

खण्ड के टोरडी सागर व घारेड़ा सागर बांध में टोंक जिले के 86 गांव कमाण्ड क्षेत्र में आते है। अगर पानी मिल जाए तो किसानों को फायदा मिल सकता है। प्रोजेक्ट हुआ था तैयार: पिछली भाजपा सरकार ने चंबल बेसिन के नदी जोड़ों अभियान में रावतभाटा क्षेत्र के श्रीपुरा-दौलतपुरा गांव में ब्रह्माणी बांध के निर्माण एवं बीसलपुर बांध के लिए बनास नदी तक टनल निर्माण को लेकर करीब 6 हजार करोड़ की लागत का बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया था।

इसमें ब्रह्माणी नदी के व्यर्थ बहने वाले पानी का उपयोग बनास नदी में जोडकऱ किया जाना था। बीसलपुर बांध में पानी आने से न केवल जयपुर व अजमेर बल्कि टोंक समेत अन्य जिलों को भी लाभ मिलता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जयपुर दौरे में सबसे बड़ी सौगात का आश्वासन भी मिला था। मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर केंद्र से फंड की मांग की।

इस पर प्रधानमंत्री ने सहयोग का भरोसा दिया। इस परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों में पेयजल व सिंचाई समस्या को दूर करने के लिए राज्य के दक्षिणी में निकलने वाली नदियों के सरप्लस पानी का उपयोग किए जाने की योजना थी। नदियों को जोडऩे की चल रही परिकल्पना के तहत पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) नामक प्रोजेक्ट बनाया था। केंद्रीय जल आयोग ने हाइड्रोलॉजी की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।


पांच किसानों की हुई थी मौत

इस मांग को लेकर टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू व टोंक क्षेत्र के किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। संघर्ष समिति का गठन कर गत 2005 को वृह्द स्तर पर आंदोलन शुरू किया गया। तत्कालीन सरकार के खिलाफ आंदोलनरत किसानों पर गत 13 जून 2005 को पुलिस फायरिंग व लाठीचार्ज के बीच गर्भवती महिला समेत पांच किसानों की मौत हो गई थी। तब से किसान सिंचाई के पानी को लेकर संघर्षरत है।


जल संसाधन अभियंताओं ने किया था अध्ययन

क्षेत्रवासियों की लम्बित इस मांग का निस्तारण बीसलपुर बांध में 12 माह पानी रहने तथा प्रतिवर्ष ओवर फ्लो की स्थिति होने पर ही संभव है। जल संसाधन अभियंताओं ने बताया कि बीसलपुर बांध की भौतिक स्टडी में सामने आया कि केन्द्र की नदी जोड़ो परियोजना में बीसलपुर बांध की बनास नदी को ब्रह्माणी नदी से जोड़ा जाना चाहिए।

-बीसलपुर बांध का पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने की मांग किसानो की वर्षों से है। संघर्षरत किसानों की पानी के लिए जान भी गई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने हमेशा उपेक्षा की है।
शिवजी लाल, बुर्डक, किसान।

-बांध निर्माण के साथ किसानों की बीसलपुर बांध के ओवर फ्लो के पानी टोरडी व घारेडा सागर बांध में डाले जाने की मांग है। वहीं मांग पूरी नहीं होने पर किसान ठगा सा महसूस करता है।
विजय सिंह राजावत, किसान नेता

-बीसलपुर बांध का निर्माण टोंक जिले की धरती पर हुआ है। दर्जनों गांवों के सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं। इसलिए बीसलपुर के पानी पर पहला हक टोंक जिले का है। उनको पानी मिलना चाहिए।
रतन खोखर, प्रदेश मंत्री, किसान महापंचायत

Published on:
11 Jan 2023 04:46 pm