
टोंक/दूनी । खेत में बोई फसल किसान और उसके परिवार की आय का प्रमुख आधार होती है। फसल पककर घर आने तक पूरा परिवार खेत और उसकी उपज पर उम्मीद लगाए रहता है। लेकिन कभी मौसम तो कभी बाजार किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देता है।
ऐसा ही भरनी क्षेत्र के किसानों के साथ हुआ, जहां हजारों रुपए खर्च कर तैयार की गई लौकी की फसल के पकने के बाद बाजार भाव अचानक गिर गए। हालत यह है कि मंडियों में ग्राहक नहीं मिलने से लौकी के ढेर लग गए हैं और किसानों को उपज खेत में छोड़ने अथवा पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
भरनी और आसपास के किसानों ने पिछले वर्ष लौकी के अच्छे भाव मिलने के बाद इस बार खेतों में बड़े स्तर पर इसकी बुआई की थी। किसानों के अनुसार फसल भी अच्छी हुई, लेकिन बाजार में पहुंचते ही भाव अचानक गिर गए। इससे उनकी पूरी मेहनत और लागत पर पानी फिर गया।
किसान सुरेंद्र केवट, हेमा बैरवा सहित अन्य किसानों ने बताया कि अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में उन्होंने महंगे हाईब्रिड बीज खरीदकर लौकी की बुआई की थी। फसल तैयार होने के बाद मंडियों में न तो पर्याप्त ग्राहक मिल रहे हैं और न ही उचित भाव।
कई जगह लौकी के ढेर लगे हुए हैं। किसानों का कहना है कि उपज मंडी तक पहुंचाने का किराया तक वसूल नहीं हो पा रहा है। कोटा के व्यापारी भी अब लौकी नहीं लाने की बात कह रहे हैं।
ऐसे में किसान तैयार फसल को खेत में ही छोड़ने या पशुओं को खिलाने को मजबूर हैं। किसानों के मुताबिक गर्मी के मौसम में फसल को बचाने के लिए सिंचाई, नियमित दवा छिड़काव, बीज और अन्य कृषि कार्यों पर करीब 50 हजार रुपए प्रति बीघा तक खर्च आया है। इसके बावजूद बाजार भाव नहीं मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इधर खरीफ फसल पकने के साथ ही किसानों के लिए गिरदावरी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खेत में खड़ी फसल की गिरदावरी फसल काटने अथवा खेत जोतने से पहले करना जरूरी है। किसान राज किसान गिरदावरी एप के माध्यम से स्वयं भी अपनी फसल का विवरण दर्ज कर सकते हैं।
समय पर गिरदावरी नहीं होने पर फसल खराबे के आकलन, मुआवजे और फसल बीमा से जुड़ी प्रक्रिया में किसानों को परेशानी हो सकती है। गिरदावरी में दर्ज फसल का विवरण आगे फसल खराबे के आकलन सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में किसानों को फसल खेत में खड़ी रहने के दौरान ही गिरदावरी की प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
फसल कटने अथवा खेत जोतने के बाद गिरदावरी कराने पर मौके पर वास्तविक फसल की स्थिति का सत्यापन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी फसल का रिकॉर्ड दर्ज कराएं।