टोंक के छावनी क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की छात्राओं के लिए संचालित छात्रावास में चल रही हरकतें तो मानवता को शर्मसार करनी वाली निकली।
टोंक। महिलाओं व बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने समेत आजादी देने के लिए सरकारें भले ही कार्यकर रही हो, लेकिन टोंक शहर में महिलाओं व बेटियों के हालात दयनीय हैं। शहर के छावनी क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की छात्राओं के लिए संचालित छात्रावास में चल रही हरकतें तो मानवता को शर्मसार करनी वाली निकली।
जबकि जिले की पुलिस अधीक्षक व नगर परिषद सभापति समेत अन्य पदों पर महिलाएं काबिज हैं। इसके बावजूद महिलाओं के हालात बदतर हैं। ये खुलासा गुरुवार सुबह उपखण्ड अधिकारी प्रभातीलाल जाट के छात्रावास का निरीक्षण करने के दौरान हुआ। छात्राओं की बातें सुनकर वे हतप्रभ रह गए। छात्राओं के कक्ष में देर रात शराब के नशे में पुरुष अर्द्धनग्न घुस जाते हैं। वे उनके पलंग पर भी बैठ जाते हैं। कुछ कहने पर छात्रावास से निकाले जाने की धमकी दी जाती है।
उपखण्ड अधिकारी ने संचालक समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट जिला कलक्टर को दी है। उपखण्ड अधिकारी ने बताया कि ये छात्रावास छावनी में प्रेरणा एजुकेशन सोसायटी संचालित करती है। इसमें अल्पसंख्यक छात्राएं रहती हैं। वे कक्षा दस से लेकर स्नातक की पढ़ाई कर रही है।
भरपेट खाना भी नहीं मिलता
नियमों के अनुसार तय समय पर छात्राओं को नाश्ता तथा भोजन उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन छात्रावास में उन्हें नाश्ता तो कभी दिया ही नहीं जाता। भोजन इतना ही मिलता है, जिससे पेट नहीं भरता। दोबारा मांगने पर कार्मिक फटकार देते हैं।
चौंकाने वाली बात ये है कि पावभर दूध में छात्राओं की चाय बनाई जाती है। एक चम्मच तेल में ही दर्जनों छात्राओं के लिए सब्जी बनाई जाती है। तीन महीने में एक बार नहाने के लिए 10 रुपए का साबुन दिया जाता है। पलंग की चादर भी छात्राएं ही धोती है। बालों का तेल पूरे सत्र में एक बार ही उपलब्ध कराया जाता है।
सुनसान सडक़ पर अकेली भीगती रही
स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा ने बताया कि वह गत 24 अगस्त की शाम साढ़े पांच छात्रावास आई थी। देरी से आने पर कार्मिकों ने रात साढ़े 9 बजे बरसात के दौरान ही उसे छात्रावास से निकाल दिया। रात के समय वह काफी देर तक सुनसान सडक़ पर भीगती रही। बाद में वह किसी परिचित के घर गई।
बिजली भी चोरी की
निरीक्षण में पाया कि छात्रावास में बिजली चोरी की जा रही है। एसडीओ ने विद्युत वितरण निगम के कनिष्ठ अभियंता को निर्देश देकर कार्रवाई कराई। इसके तहत बिजली के तार काट दिए गए। बाद में छात्राओं की सुविधाओं को देखते हुए बिजली की व्यवस्था की गई।
प्रशासन की अंधेरगर्दी
जिले के आला अधिकारी व जनप्रतिनिधि अधिकतर कार्यक्रम तथा बैठकों में महिलाओं को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इस छात्रावास की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। जबकि इसकी तीन रिपोर्ट अल्पसंख्यक मामलात विभाग उच्चाधिकारियों को दे चुका है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से इस छात्रवास की अव्यवस्थाओं तथा स्थिति की रिपोर्ट गत 31 अक्टूबर, 20 नवम्बर तथा 20 दिसम्बर को दी, लेकिन अधिकारियों की कान पर जूं नहीं रेंगी।