टोंक

देवली शहर की जलापूर्ति में 20 प्रतिशत पानी की कटौती, अब दो दिन में एक बार मिलेगा पानी

बारिश की कमी के चलते बीसलपुर परियोजना से मिलने वाले पानी में कटौती से शहर की जलापूर्ति प्रभावित होगी।  
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Sep 04, 2018
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पानी की कमी को देखते हुए बीसलपुर पेयजल योजना से जुड़े अभियंताओं ने पिछले सप्ताह ही शहर की जलापूर्ति में 20 प्रतिशत पानी की कटौती कर दी थी।

देवली. मानसून की कमी के चलते शहरवासियों को पानी की किल्लत के रूप में उठाना पड़ेगा। बारिश की कमी के चलते बीसलपुर परियोजना से मिलने वाले पानी में कटौती से शहर की जलापूर्ति प्रभावित होगी। ऐसे में जलदाय विभाग को शहर में दो दिन में एक बार जलापूर्ति करनी पड़ेगी।

दरअसल, शहर में पर्याप्त जलापूर्ति के लिए प्रतिदिन 35 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसमें देवली शहर के साथ हनुमाननगर की करीब एक दर्जन बड़ी कॉलोनियों भी शामिल हंै, बांध में पानी की कमी को देखते हुए बीसलपुर पेयजल योजना से जुड़े अभियंताओं ने पिछले सप्ताह ही शहर की जलापूर्ति में 20 प्रतिशत पानी की कटौती कर दी थी।

वहीं उक्त कटौती अब 15 प्रतिशत बढ़ाकर सोमवार को 35 प्रतिशत कर दी गई। ऐसे में पूर्व में 24 लाख लीटर पानी बीसलपुर योजना से मिलता था, जो अब घटकर 19 लाख लीटर रह गया। वहीं बारिश की बेरुखी से क्षेत्र के प्रमुख जलस्रोत देवपुरा में भी पानी की कमी हो गई है। जहां देवपुरा से पूर्व में 7 से 8 लाख लीटर पानी प्रतिदिन मिलता था, जो पानी की कमी के चलते घटकर अब महज 5 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है।


जलदाय विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि पानी की कमी के चलते शहर की जलापूर्ति कम होगी। व्यवस्था के लिए शीघ्र ही शहर की जलापूर्ति 48 घंटे में एक बार होगी। हालांकि उक्त व्यवस्था जिले में सभी स्थानों पर पहले ही हो चुकी है, लेकिन कटौती के साथ अब देवली में भी विभाग को यह व्यवस्था करनी पड़ेगी।

बीसलपुर परियोजना से पानी की मात्रा में कटौती के चलते 9 लाख लीटर पानी कम मिल रहा है। वहीं देवपुरा जलास्त्रोत में भी पानी कम है। मजबूरन शहर की 48 घंटे में एक बार जलापूर्ति व्यवस्था करनी पड़ेगी।
प्रदीप तिवाड़ी, सहायक अभियंता, पीएचईडी, देवली


रिमझिम बारिश
मालपुरा. उपखण्ड क्षेत्र में रविवार देर रात्रि से शुरू हुई बरसात सोमवार को भी दिन भर जारी रही। वहीं बारिश से क्षेत्र में खड़ी मूंग की फसल में नुकसान होने की आशंका से किसानों के चेहरों पर चिन्ता की लकीरें हैं। वहीं जिन किसानों ने बरसात ने पूर्व कटाई करा ली थी।

उनके भी मंडियों की हड़ताल के चलते मूंग के खराब होने की आशंका नजर आने लगी है। कृषक रामलाल चौघरी ने बताया कि मूंग की फसल कम्पान मशीन से निकलवाने पर गीली रहती है। मण्डियों की हड़ताल के कारण फसल खराब होने की आशंका बनी हुई है। इसके चलते किसानों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।

Published on:
04 Sept 2018 01:45 pm