
भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर. प्रदेश में कच्ची उम्र के अपचारियों को जहां रखकर समाज के लायक बनने के लिए तैयार किया जाता है, उस सम्प्रेषण गृह की पक्की दीवारें भी इन कच्ची उम्र के अपचारियों को उस परिधि में रखने में कच्ची ही साबित हुई हैं। यानी सरकार ऐसे बच्चों को सही राह पर चलने की शिक्षा देने में नाकाम रहीं। राज्य में वर्ष 2014 से 2017 तक 253 अपचारियों ने पलायन किया है। यही नहीं, अधिकांश मामलों में ये बच्चे बकायदा वहां मौजूद कर्मचारियों की आंखों में धूल झोंक वहां से भागे हैं।
सर्वाधिक जयपुर से
वर्ष 2014 से अब तक सर्वाधिक जयपुर से 56 बाल अपचारियों ने पलायन किया है, जबकि इन बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रखने के निर्देश होते हैं, साथ ही दूसरे नम्बर पर भरतपुर में 31, अलवर में 25 और सवाईमाधोपुर से 23 बच्चों ने पलायन किया है।
ये है कानून
अधिनियम की धारा आठ में विधि के साथ संघर्षरत बालक, बालिकाओं के लिए सम्प्रेषण गृह का प्रावधान हैं। किशोर न्याय बोर्ड के आदेशों के तहत इन बालक-बालिकाओं की जांच लम्बित रहने, जमानत होने या अंतिम निपटान तक रखा जाता है। इन्हें सभी सुविधाएं भी सरकार उपलब्ध करवाती है। 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें विशेष गृहों में भेज दिया जाता है।
कर रहे हैं तैयारी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी का कहना है कि जो भागे थे, इनमें से अधिकांश कट्टर अपचारी है। नियमानुसार इन्हें पुलिस सुरक्षा में नहीं रखा जाता, इसलिए ये अपचारी वहां के सुरक्षाकर्मियों से मारपीट कर भाग जाते हैं। हम भागे हुए अपचारियों में से अधिकांश को फिर लाए हैं। इसके लिए राज्य में 17 स्थानों पर हम अलग गृह बना रहे हैं, जिनमें कट्टर अपचारियों को रखा जाएगा। प्रयास कर रहे हैं कि इन्हें मानसिक तौर पर भी ठीक करें।
जिला - अवधि - पलायन बच्चों की सं.
उदयपुर -2014-17 - 06
अजमेर -16-17 - 01
अलवर - 14-17 - 25
बांसवाड़ा - 14-17 - 03
बारां 14-17 - 10
भरतपुर 15-17 -31
भीलवाड़ा 15-17 -02
बीकानेर 16-17 - 05
बीकानेर 15-16 -02
(बालिका)
बूंदी 14-16 -05
चूरू 14-15 -04
धौलपुर 14-17 -05
दौसा 14-16 -05
डूंगरपुर 15-17 -11
जयपुर 16-17 -56
जयपुर 14-16 -03
(बालिका )
झुन्झुनूं 15-17 - 11
जोधपुर 14-15 -01
करौली 16-17 -01
पाली 14-17 -03
राजसमन्द 16-17 -01
स.माधोपुर 14-17 - 29
सीकर 14-16 -06
सिरोही 14-16 -08
श्रीगंगानगर 14-17 -08