
हेमन्त गगन आमेटा/वल्लभनगर. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया के मौके पर अक्षय तृतीया का पर्व रवि योग और राज योग से मनाया गया। जिसमें अक्षय तृतीया पर अबुझ मुहुर्म होने के चलते वल्लभनगर क्षैत्र में शादियों की धूम मची रही जिसमें कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधें। इसके साथ ही इस दिन कई अन्य अनूठे संयोग भी बने तथा विभिन्न स्थानों पर शादियों के साथ ही विभिन्न समाजों की ओर से सामूहिक विवाह सम्मेलन भी आयोजित किए गए।
पंडितों के अनुसार अक्षय तृतीया के अवसर पर सुबह 6: 53 बजे मंगल वृष राशि छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश किया वहीं राहू पहले से ही मिथुन राशि में विचरण कर रहा है इस कारण मिथुन राशि में मंगल राहु का योगदान चांडाल योग बना जो कि 22 जून तक रहेगा इसके चलते निकट भविष्य में प्राकृतिक आपदाएं होने की संभावनाएं भी रहेगी। इसके साथ ही अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का अवतार दिवस और त्रेता युग की शुरुआत का सहयोग भी बनने से यह दिन और भी खास हो गया।
शुभ कार्यो के साथ किया दान पूण्य
अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुभ कार्य के साथ ही खरीदारी, दान, पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। चंद्रमा शुक्र और सूर्य उच्च राशि में होने के कारण इस तिथि पर किए गए दान से अक्षय फल मिलता है जिसके कारण लोगो ने खासतौर पर जो, गेहूं, चना, सत्तू, चावल, गन्ने का रस, दूध से बनी चीजें, जल से भरा कलश सहित अन्य वस्तुओं का दान कर पुण्य अर्जित किए।
शुभ मुहूर्त पर की खरीदारी
वल्लभनगर कस्बे में अक्षय तृतीया के अवसर पर बाजारों में काफी रौनक रही व खरीदारी की गई। वल्लभनगर कस्बे सहित आसपास नवानिया, रुंडेडा, किकावास, नेतावला, गुमानपुरा, गरियावास सहित कई गांव के ग्रामीण वल्लभनगर कस्बे में खरीदारी करने पहुंचे जिससे पूरे दिन बाजार में खरीदारों की भीड़ देखी गई।