
दीपोत्सव के तहत मंगलवार को अन्नकूट के आयोजन शुरू हुए। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत धारण करने पर बृजवासियों की ओर से विभिन्न व्यंजनों से उनकी पूजा करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। महंत रासबिहारी शरण ने बताया कि मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर देव दीपावली पूर्णिमा तक होते हैं। इसी के तहत मंगलवार को अस्थल मंदिर में अन्नकूट उत्सव का आयोजन किया गया। भगवान द्वारिकाधीश को सफेद जरी के वस्त्र, माणिक, मोती का स्वर्ण मुकुट धारण करा चांदी की हटड़ी में बाहर विराजमान कराया गया। उनके सम्मुख 56 भोग में मठरी, गुझिया, जलेबी, खीर, मालपुआ, बालूशाही, घेवर, मोहनथाल, विभिन्न प्रकार के नमकीन, सब्जियां अरबी, मूली, रतालू, कद्दू, पालक के साथ कच्चा भोजन, कड़ी, चवले, बाटी आदि पधराई गई। ठाकुरजी के सम्मुख चावल, चवले व बाजरे का प्रतीकात्मक पहाड़ भी बनाया गया। इसी तरह महालक्ष्मी मंदिर, जगदीश मंदिर, बोहरा गणेश मंदिर में भी अन्नकूट का आयोजन हुआ। इस दौरान श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं, महालक्ष्मी मंदिर में दीपोत्सव समिति की ओर से भजन संध्या का आयोजन भी हुआ।