
कचरा ट्रांसफर स्टेशन के बाहर लगी टेम्पो की कतारें।
उदयपुर. नगर निगम के घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता व्यवस्था के दावों की पोल सोमवार को कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर खुल गई। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कचरा लेकर पहुंचे बड़ी संख्या में ऑटो टिपर कई घंटे तक ट्रांसफर स्टेशन के बाहर कतारों में खड़े रहे, लेकिन कचरे को तबाने वाले चारों कैप्सूल पहले से भरे होने के कारण उनमें कचरा खाली नहीं हो सका। इसका सीधा असर शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर पड़ा और कई क्षेत्रों में संग्रहण प्रभावित रहा।
ट्रांसफर स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों के अनुसार यहां एकत्र कचरे को तीतरड़ी स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है। वहां कचरा निस्तारण की मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है, जिसके कारण कचरे का नियमित निस्तारण नहीं हो पा रहा। नतीजतन ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के ढेर जमा हो गए हैं और अब इसकी मार ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंच गई है। कैप्सूल समय पर खाली नहीं होने से नए वाहनों का कचरा उतारना मुश्किल हो गया। स्थिति यह रही कि सुबह से पहुंचे ऑटो टिपर चालक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इससे तय समय पर अन्य वार्डों में कचरा संग्रहण भी प्रभावित हुआ और पूरे सिस्टम की रफ्तार थम गई।
दो दिन से समस्या
नगर निगम में स्वच्छता शाखा के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पिछले दो दिन से यह समस्या बनी हुई है और इसके समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने ट्रांसफर स्टेशन के बाहर ऑटो टिपरों के कई घंटे तक खड़े रहने की जानकारी नहीं होने की बात कही।
व्यवस्था पर सवाल
यह स्थिति नगर निगम की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब ट्रांसफर स्टेशन और ट्रेंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था ही बाधित है, तब शहर में निर्बाध घर-घर कचरा संग्रहण और बेहतर स्वच्छता के दावों की वास्तविकता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
दूधतलाई में कचरा पहाड़ी पर फेंक रहे दुकानदार, खराब कर रहे छवि
शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल दूधतलाई इन दिनों कचरे की समस्या से जूझ रहा है। माणिक्यलाल वर्मा पार्क की चढ़ाई के पास पहाड़ी क्षेत्र को कुछ व्यवसायियों ने डंपिंग यार्ड बना दिया है। यहां प्रतिदिन फेंके जा रहे व्यावसायिक कचरे से गंदगी और दुर्गंध फैल रही है, जिससे पर्यटकों के सामने शहर की छवि भी प्रभावित हो रही है।
दूधतलाई क्षेत्र में माणिक्यलाल वर्मा पार्क, करणी माता मंदिर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क, लवकुश वाटिका तथा पिछोला झील का विहंगम दृश्य देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन गतिविधियों के कारण यहां रेस्टोरेंट, चाय-कॉफी के ठेले तथा विभिन्न वस्तुओं की कई दुकानें संचालित हैं।
दीवार के पीछे फेंका जा रहा कचरा
स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में व्यावसायिक कचरा संग्रहण करने वाली नगर निगम की गाड़ी नहीं आने से अधिकांश व्यवसायी अपना कचरा माणिक्यलाल वर्मा पार्क की चढ़ाई के पास दीवार के पीछे पहाड़ी पर फेंक देते हैं। धीरे-धीरे यहां बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है। इसी रास्ते से प्रतिदिन कई पर्यटक पैदल भी गुजरते हैं, जिन्हें गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।
शुल्क से इनकार किया तो संग्रहण भी बंद
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस क्षेत्र में व्यावसायिक कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी नियमित रूप से आती थी, लेकिन अधिकांश व्यवसायियों ने उसका मासिक शुल्क देने से इनकार कर दिया। इसके बाद कचरा संग्रहण वाहन ने इस क्षेत्र में आना बंद कर दिया। अब आसपास के व्यवसायी प्रतिदिन शाम को अपना कचरा इसी स्थान पर डालकर चले जाते हैं।
पाबंद करे निगम
स्थानीय लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि व्यवसायियों को नियमों की पालना के लिए पाबंद किया जाए तथा क्षेत्र में सुबह और शाम नियमित रूप से व्यावसायिक कचरा संग्रहण वाहन भेजकर व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल की स्वच्छ छवि और अधिक प्रभावित होगी।
Updated on:
13 Jul 2026 05:46 pm
Published on:
13 Jul 2026 05:46 pm
