
उदयपुर. ayurved college पंडित मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय ने इतिहास में नया बदलाव करते हुए नवप्रवेशित आयुर्वेद विद्यार्थियों को शिक्षा कार्य से पहले वेदों का ज्ञान बताया। पुराने समय में गुरुकुल में दिए जाने वाले वेद संस्कार को इस मंच पर सीखना विद्यार्थियों की जिंदगी के अवस्मरणीय पलों में शामिल हो गया। नीट 2019 की परीक्षा चयनित करीब 75 आयुर्वेदाचार्यों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। राजस्थान काउंसलिंग बोर्ड की ओर से चुने गए विद्यार्थियों एवं उनके परिजनों का स्वयं महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. महेश दीक्षित ने स्वागत किया। इससे पहले वेदारंभ कार्यक्रम का प्रारंभ भगवान धन्वन्तरि की वन्दना एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। सर्वप्रथम कार्यक्रम संयोजक डॉ. अजय कुमार शर्मा ने वेदारंभ का परिचय देते हुए कहा कि वेदों में सोलह संस्कार बताए गए हैं। इसमें शिक्षा आरंभ करते समय वेदारंभ संस्कार का उल्लेख मिलता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य दीक्षित ने कहा कि वर्तमान में दादी-नानी के नुस्खे आज भी उतने ही कारगर है, जितने पहले थे। चोट लगने पर हल्दी का दूध पिलाया जाता है, जो एक औषधि का काम करते हुए लाभकारी परिणाम देता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में समर्पित एवं अनुशासित रहते हुए अध्ययन करने की आवश्यकता है। वेदारंभ परम्परा के माध्यम से प्रेरणा लेकर एक सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। विधि विधान वेदारंभ कार्यक्रम में वैदिक के साथ यज्ञ, पूजन-अर्चन, प्रौक्षण आदि कार्यक्रम हुए। नवआगन्तुकों को उपरना, तिलक के साथ उनका अभिनन्दन किया गया। वेदारंभ संस्कार में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. राज्यवद्र्वन सिंह राय ने भी नवआगन्तुकों को आशीर्वचन एवं बधाई देते हुए कहा कि यह महाविद्यालय भारतवर्ष में प्रतिष्ठित महाविद्यालय है। इस संस्था के विद्यार्थियों की ओर से अध्ययन से संबंधित कई गतिविधियों में अग्रणी रहते हुए महाविद्यालय का नाम रोशन किया है। बतौर मुख्य अतिथि पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि मातृशक्ति की जहां पूजा होती है। ayurved college वहां देवता निवास करते हैं । आभार डॉ. किशोरीलाल शर्मा ने व्यक्त किया।