
मेनार . बर्ड विलेज मेनार bird village menar के तालाबों में पक्षी संरक्षण के तरीकों को जानने के लिए देश-दुनिया से वैज्ञानिकों, पक्षी संरक्षकों एवं जानकारों तथा अर्थशास्त्रियों का 25 सदस्यीय दल पक्षीविद् विनय दवे एवं आशीष कोठारी के नेतृत्व में रविवार सुबह यहां पहुंचा।
दल का ग्रामवासियों ने धण्ड तालाब स्थित महादेव मंदिर में स्वागत किया। कल्पवृक्ष एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप के तत्वावधान में दल ने मेनार की दोनों झीलों का भ्रमण किया। ग्रामीणों एवं युवाओं ने उन्हें मेनार में दोनों झीलों के निर्माण, वर्तमान में इनके संरक्षण व कैसे ये प्रवासी परिन्दों का पसंदीदा व सुरक्षित पनाहगाह बना, इसके बारे में जानकारी दी तो दल के सदस्य काफी प्रभावित और रोमांचित हुए। पूर्व सरपंच ओंकार लाल मेनारिया ने दल की ग्रामीणों व युवाओं के साथ परिचर्चा के दौरान गांव के इतिहास के बारे में बताया। पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया व राधेश्याम कानावत ने मेनार पक्षी विहार में जल संरक्षण के बारे में जानकारी दी। शोधकर्ता दर्शना दवे ने वेटलैंड wetland में फूड फीडिंग के बारे में बताया। ग्रामीणों एवं पक्षी मित्रों ने दल को बताया कि दोनों तालाबों में शिकार वर्जित है, मत्स्याखेट नहीं होता है। तालाबों का पानी सिंचाई के लिए भी उपयोग में नहीं लिया जाता है।
इस दौरान उपसरपंच शंकरलाल, विजय लाल एकलिंगदासोत, कन्हैयालाल ठाकरोत, मांगीलाल मेरावत, मांगीलाल गदावत, रमेश जोशी सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे। दल ने राजस्थान के परम्परागत भोजन दाल-बाटी, चूरमे का स्वाद चखा, वहीं कंडे के उपयोग से खाना बनाने की विधि को जाना। दिनभर ग्राम में भ्रमण के बाद शाम को शिव प्रतिमा के पास बुर्जुगों से चर्चा की ।
ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की
नेपाल, फ्रांस, म्यामांर, स्पेन, तंजानिया, कनाडा, फिनलैंड, अफ्रीका, भूटान, आंध्रप्रदेश, लद्दाख, असम से आए विशेषज्ञों ने सवाल-जवाब के जरिये गांव के युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों के व्यवसाय, उनके जीवन स्तर, समाज में उनकी भूमिका व पर्यावरण को बचाने में योगदान व जलवायु परिवर्तन के बारे में जिज्ञासाओं को शांत किया। सदस्यों ने तालाबों के संरक्षण में ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की।