
रुण्डेड़ा (उदयपुर). जिलेभर में सुबह-शाम हल्की ठंडक का एहसास बढ़ गया है। मौसम अनुकूल होते ही स्मार्ट विलेज रुण्डेड़ा के तालाब पर मेहमान परिंदों का आगमन शुरू हो गया है। मेहमान परिंदों की दस्तक के बाद अब सुबह-शाम इन परिंदों की चहचहाट गूंजने लगी है। वर्तमान में इन पक्षियों को देखने के लिए पक्षी विशेषज्ञ तालाब पर पहुंचना शुरू हो गए है।
उदयपुर से आए वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर रोहित द्विवेदी ने रुण्डेड़ा तालाब पर ब्लैक नेक्ड स्टोर्क, ओस्प्रे, यूरेशियन स्पून बिल, इजिप्शियन वल्चर, इंडियन स्पोटेड ईगल, यूरेशियन विजन, स्पोटेड डक, बार हैडेड गूज, रडी शैल डक, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, लिटिल ग्रीब, चेस्टनट बिल्ड सेण्ड ग्राउज, मार्श हैरियर, सारस क्रेन, कॉमन क्रेन,लिटिल रिग्ड प्लॉवर, ब्लैक टेल्ड गॉडविट, रफ, कॉमन सेंडपाईपर, वूलीनेक्ड स्टोर्क, ग्रे हेरॉन, पर्पल हेरॉन, ब्लैक विंग्ड काईट पक्षी देखे। साथ ही अपने कैमरे में पक्षियों की अठखेलियों को कैद किया।
उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से रूण्डेड़ा तालाब पर आ रहे है। लेकिन यहां पहली बार ब्लैक नेक्ड स्टोर्क पक्षी को देखा है। इस पक्षी को काली गर्दन वाले सारस व एक बड़ा पक्षी के नाम से भी जाना जाता है। यह 129-150 सेमी लंबा होता है और इसके पंखों का फैलाव 230 सेमी तक होता है। काली गर्दन वाला सारस ( एफिपिओरिन्चस एशियाटिकस) सारस परिवार का एक लंबा गर्दन वाला पक्षी है। यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में एक निवासी प्रजाति है। इसका सिर चमकदार नीला-काला इंद्रधनुषी जैसा होता है। नर और मादा में अंतर इसकी आंखों से किया जा सकता है। मादा की आंखें चमकदार पीली जबकि नर की आंखें गहरे भूरे रंग की होती है।
भारत में यह प्रजाति पश्चिम, मध्य उच्च भूमि और उत्तरी गंगा के मैदानी इलाकों में पूर्व में असम घाटी तक फैली हुई है। लेकिन प्रायद्वीपीय भारत में थोड़ा दुर्लभ है। काली गर्दन वाले सारस विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक और कृत्रिम आर्द्रभूमि आवासों में भोजन करते हैं। वे अक्सर मीठे पानी, प्राकृतिक आर्द्रभूमि आवासों जैसे झीलों, तालाबों के आसपास अपने भोजन की तलाश करते हुए दिखाई देते है। भारत में घोंसले का निर्माण मानसून के चरम के दौरान शुरू होता है, अधिकांश घोंसले सितंबर-नवंबर के दौरान बनाए जाते है। ये अपने घोंसले बडे-बडे पेड़ो पर बनाते है।