
भुवनेश पंड्या/ उदयपुर. आज की जीवन शैली ने कैंसर को पहले से ज्यादा भयावह बना दिया है, इसलिए कि अब न केवल मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है बल्कि कैंसर ने अपना रूप तक बदल दिया है। अव्यवस्थित दिनचर्या और मनमर्जी के खान-पान ने कैंसर को नई सीढ़ी चढ़ा दिया है। उदयपुर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने वाले मरीजों की बात की जाए तो वर्तमान में यहां प्रतिवर्ष करीब 17 हजार मरीजों का अलग-अलग उपचार हो रहा है।
यूं बदला रूप
आज से पांच वर्ष पहले उदयपुर में नए मरीजों की संख्या वार्षिक करीब नौ सौ होती थी, लेकिन अब ये प्रतिवर्ष बढकऱ करीब 2560 हो गई। इसमें 1320 पुरुष व 1240 महिलाएं शामिल हैं। इसी प्रकार ओल्ड फोलोअप पर नजर डालें तो यहां 14 हजार मरीज उपचाररत हैं, जिनमें पांच हजार पुरुष व 7 हजार महिलाएं शामिल हैं।
पहले ये अब ये
- पांच वर्ष पहले महिलाओं में बच्चेदानी में कैंसर और पुरुषों में फेंफडे का कैंसर सामान्य था, जबकि अब महिलाओं में स्तन व पुरुषेां में मुंह, नाक, कान व गले का कैंसर सामने आ रहा है।
इसलिए ये हाल:
- लाइफ स्टाइल में बदलाव शहरी आदतें, प्रोसेस फूड, हाई ऑयल का उपयोग।
- नियमित मेहनत का काम नहीं करना, मशीनों पर निर्भरता बढऩा
- युवाओं में स्मोकिंग की आदत।
- गुटखा, तम्बाकू व खैनी का उपयोग
- लगातार काम का तनाव
- शराब का सेवन
बचने का उपाय
कैंसर से बचने के लिए दिनचर्या बेहतर होनी चाहिए। अनियमित व अनियंत्रित भोजन या अन्य बाजारी सामग्री नहीं ली जाए। परिश्रम और शरीर को चुस्त रखने के लिए योग व एक्सरसाइज भी की जा सकती है।
ये है देश के हाल
वर्तमान में देश में 24 लाख मरीज है और प्रतिवर्ष 12 लाख जुड़ जाते हैं। इसी गति से चलता रहा तो 2025 में प्रतिवर्ष जुडऩे वाली संख्या 18 से 20 लाख हो सकती है। देश में ओरल, सर्वाइकल व ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल हैल्थ प्रोफाइल 2019 की रिपोर्ट के अनुसार नोन कम्प्यूनिकेबल डिजीज क्लिनिक्स ने 2017 से 18 के बीच कैंसर के मामलों की पहचान नहीं की है। इन केन्द्रों पर गैर संक्रामक बीमारियों की जांच होती है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक वर्ष के अंतराल में देश में कैंसर के मामले तीन गुना बढ़े हैं। राजस्थान में एनसीडी केन्द्रों पर पहुंचने 30 लाख 91 हजार 378 लोगों में से 1358 लोगों में सामान्य कैंसर पाया गया। 2018 में यह आंकड़ा 3414 हो गया।
यह है कारण
कैंसर बढऩे का कारण अनियंत्रित व अनियमित दिनचर्या है। यदि इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो लगातार मरीज बढेंग़े ही। इसे रोकने के लिए व्यक्ति को स्वयं अनुशासित होना होगा। दिनचर्या व खान-पान बेहतर करना होगा।
डॉ नरेन्द्र राठौड़, कैंसर रोग विशेषज्ञ, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर