
उदयपुर. वर्षा का जल शुद्ध होता है। इसमें किसी प्रकार के हार्मफुल केमिकल नहीं होते हैं। इसमें किसी प्रकार के घुलनशील केमिकल नहीं होते हैं। ऐसे में यह भूजल में व्याप्त टोटल डिजोल्ड सॉलिड (टीडीएस) को भी नियंत्रित कर देता है। शहर में कई क्षेत्रों में भू-जल में टीडीएस अधिक होने की शिकायत को वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से दूर किया गया है।
शहर के कई क्षेत्रों में भूजल में टीडीएस की भारी मात्रा पाई जाती है। मानकों के अनुसार 300 से 500 तक टीडीएस शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं होता। इधर शहर के खारा कुआं, बेदला, बडग़ांव, प्रतापनगर, शोभागपुरा, हिरण मगरी, चित्रकूट नगर सहित अन्य क्षेत्रों में 1500 से 2200 तक टीडीएस भी है।
ऐसे में यह पानी शरीर के लिए काफी नुकसानदायक है और इससे कई बीमारियां भी होती है। शहर में ऐसे कई उदाहरण है जिनमें रूफ टॉप रैन वाटर हार्वेस्टिंग से टीडीएस की समस्या को दूर किया गया है।
एनजीटी ने दिए आरओ हटाने के निर्देश
हाल ही नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने निर्देश दिए है कि 300 से 500 तक टीडीएस वाले जलस्रोतों में आरओ सिस्टम नहीं लगाने चाहिए। ये निर्देश इसलिए दिए गए कि कई आरओ टीडीएस को भी कम कर देते हैं। टीडीएस कम होने और अधिक होने दोनों से नुकसान शरीर को नुकसान होता है।
टीडीएस से होती है बीमारियां
ऑर्थोपेडिक के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विनय जोशी ने बताया कि पेयजल में टीडीएस 300 से 500 के बीच रहना चाहिए।
इससे बहुत अधिक और बहुत कम टीडीएस बीमारियों का आमंत्रित करता है। उन्होंने बताया कि टीडीएस के कारण कई बीमारियां होती है।
इनमें गाल ब्लेडर, किडनी आदि में स्टॉन के साथ ही डायरिया, पाचन क्रिया की समस्याएं, हड्डिय़ों की कमजोरी, ज्वाइंट पेन, ब्लडप्रेशर बढऩे सहित कई बीमारियां हो सकती है।
केस -1
डॉ. डीपीसिंह ने बताया कि मेरे ट्यूबवैल में भारी मात्रा में साल्ट था। ऐसे में चार वर्ष पूर्व मैने रूफ टॉप रैन वॉटर हार्वेस्टिंग लगवाया। इसके बाद से पानी का टीडीएस निरंतर कम हो रहा है। अब पानी का स्वाद मीठा हो गया है। इस पानी को कूलर, गार्डन के साथ घरेलू काम में ले रहा हूं।
केस-2
सेक्टर-4 संदीप जैन ने बताया कि उन्होंने जब ट्यूबवैल खुदवाया तो पानी में काफी टीडीएस था। जांच में टीडीएस 800 के करीब आया। इसके एक वर्ष बाद ही रूप टॉप रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया इसके बाद धीरे-धीरे टीडीएस घटकर 300 के तक आ गया। इससे भूजल स्तर भी बढ़ा है।