
कहने को प्रदेश सरकार लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। मरीज हित में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना और लैब जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन, धरातल पर सरकारी नीतियां खोखली हैं। नाम मात्र के लिए एक चिकित्सक (एमबीबीएस) के भरोसे पीएचसी चलाई जा रही है। मजाक तो तब हो जाता है, जब चिकित्सक के अभाव में नर्सिंग कार्मिक या कंपाउंडर मरीजों को दवाइयां लिखते हैं। सीधी भाषा में मानें तो सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर जरा भी सक्रिय नहीं है। दूसरी ओर संभाग मुख्यालय पर बैठे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी इस खामी के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में पसरी इन खामियों को लेकर राजस्थान पत्रिका के जारी अभियान के तहत पीएचसी रूंडेड़ा की तथ्यात्मक रिपोर्ट-
खरसाण. बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भरने वाली प्रदेश सरकार और उदयपुर संभाग मुख्यालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर नीतियां कितनी गंभीर हैं। इसकी हकीकत जांचने के लिए राजस्थान पत्रिका टीम ने रूंडेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल जानने के प्रयास किए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एक बारगी यकीन तो नहीं हुआ, लेकिन जब खुद रोगियों के मुंह से सुना तो दंग रहना लाजमी था। पता चला कि हजारों की आबादी पर बने स्वास्थ्य केंद्र पर हर मरीज का स्वास्थ्य 'भगवानÓ की उपस्थिति पर निर्भर है। चिकित्सक के अभाव में मरीज की बीमारी का भविष्य वहां मौजूद नर्सिंग कार्मिकों और कंपाउंडर की समझ पर निर्भर करता है।
आयुष चिकित्सक का पद रिक्त
ग्रामीणों की तसल्ली के लिए इस स्वास्थ्य केंद्र पर एक आयुष चिकित्सक का पद भी स्वीकृत है, लेकिन विभाग की मेहरबानी से ये पद भी रिक्त है। ऐसे में चिकित्सक की अनुपस्थिति में ग्रामीण आयुष चिकित्सक की सेवाएं भी नहीं ले पाते हैं। वहीं आयुर्वेद को लेकर भी उदासीनता बरती जा रही है।
सुविधा मानें या...
स्वास्थ्य केंद्र पर 8 कार्मिकों का स्टाफ है। इसमें तीन संविदा कार्मिक हैं। आयुष चिकित्सक व चतुर्थ श्रेणी कार्मिक का पद रिक्त है। अस्थायी तौर पर एक लड़का साफ सफाई करता है। केंद्र पर जांचें तो सभी तरह की होती है। 25 किलोमीटर परिधि के लोग दिखाने आते हैं। रोगी वाहन जैसी सुविधाएं नहीं हैं।
डॉ. कांता जणवा, प्रभारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद
कहता है सच
पीएचसी केंद्र का नाम: प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रूंडेडा, बलॉक भींडरपीएचसी की स्थापना: 1987
कर्मचारियों की संख्या: 8,
वाहन और मशीनरी: वाहन सुविधा नही है। लैब में 15 तरह की जांच सुविधा है।
पेरीफेरी के गांव: बरोडिय़ा, नेतावला, किकावास, नवानिया, अगोरिया, छपरा, मेनपुरिया, खडौदा, नाहरपुरा, रंठेडकेंद्र से दूरस्थ गांव की दूरी: 25 किमी
प्रतिदिन की रोगी संख्या: करीब 60-65