पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के बार-बार उदयपुर दौरों को लेकर अब सीधे राष्ट्रपति भवन तक शिकायत पहुँच गई है। उदयपुर के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कटारिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।
राजस्थान की राजनीति के दिग्गज और वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया अपने गृह नगर उदयपुर के दौरों को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उदयपुर के अधिवक्ता और पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत पत्र लिखकर कटारिया के 'अत्यधिक उदयपुर प्रेम' और स्थानीय प्रशासन में कथित दखलअंदाजी पर कड़ी आपत्ति जताई है।
डॉ. विप्लवी का आरोप है कि राज्यपाल जैसे गरिमामय संवैधानिक पद पर रहते हुए कटारिया का व्यवहार एक सक्रिय राजनेता जैसा है, जो सीधे तौर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
शिकायती पत्र में सबसे बड़ी आपत्ति कटारिया के दौरों की आवृत्ति (Frequency) को लेकर है। डॉ. विप्लवी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल बनने के बाद से ही गुलाबचंद कटारिया हर महीने लगभग एक सप्ताह या उससे अधिक समय उदयपुर में बिताते हैं।
पत्र में एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया गया है कि कटारिया सर्किट हाउस में बकायदा "जनता दरबार" लगाकर जनसुनवाई करते हैं।
शिकायत में कहा गया है कि कटारिया नगर निगम के टेम्पो स्टैंड शेड के जीर्णोद्धार जैसे बेहद छोटे स्तर के कार्यों का लोकार्पण कर रहे हैं, जो राज्यपाल के पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।
इसी तरह से उदयपुर के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में, जहाँ राजस्थान के कुलाधिपति (राज्यपाल) मौजूद रहते हैं, वहां पंजाब के राज्यपाल की मंच पर उपस्थिति को भी अनुचित और प्रोटोकॉल के विरुद्ध बताया गया है।
डॉ. विप्लवी ने पत्र में कटारिया के अतीत के कुछ विवादों का भी जिक्र किया है:
डॉ. विप्लवी ने राष्ट्रपति से मांग की है कि राज्यपाल पद की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पत्र में एक रोचक सुझाव भी दिया गया है: "यदि कटारिया का उदयपुर में रहना इतना ही अनिवार्य है, तो उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया जाए, ताकि वे गांधीनगर से उदयपुर आसानी से आ-जा सकें और संवैधानिक कार्यों में बाधा न पड़े।"
इस पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राजस्थान के राज्यपाल को भी भेजी गई हैं, जिससे इस मामले ने अब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है।