
उदयपुर. सफलता का रास्ता अक्सर वहीं से शुरू होता है, जहां लोग आपका मजाक उड़ाते हैं। इसी सोच के साथ आगे बढ़ा मावली क्षेत्र के छोटे से गांव का बाबूलाल गमेती। महज 10वीं तक पढ़ा पेशेवर इलेक्ट्रीशियन बाबूलाल (24) देखते ही देखते कंटेंट क्रिएटर बन गया। कभी सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने पर लोग ताने मारते थे, लेकिन आज वही युवा 'बाबू आरजे 27' के नाम से लाखों लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुका है।
मावली तहसील के पालवास नागो का खेड़ा गांव का रहने वाला बाबूलाल का बचपन साधारण परिवार में बीता। पिता प्रकाश चंद्र पेशे से ड्राइवर हैं, जबकि मां कंकूबाई खेती बाड़ी में जुटी हुई हैं। आर्थिक परिस्थितियों के कारण बाबूलाल ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और वर्ष 2020 में इलेक्ट्रीशियन का काम सीखने के लिए शहर आ गया। दो साल तक मेहनत कर उसने इस काम में अनुभव हासिल किया, लेकिन उसके मन में कुछ अलग करने की चाह हमेशा बनी रही।
वीडियो देख मजाक उड़ाते थे लोग
बाबूलाल ने इंस्टाग्राम पर 'बाबू आरजे 27' नाम से अकाउंट बनाया। शुरुआती दिनों में दोस्तों के साथ खेतों में खड़े होकर हिंदी में कॉमेडी वीडियो बनाए, लेकिन मनचाही सफलता नहीं मिली। एक महीने तक लगातार वीडियो अपलोड करने के बावजूद कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आई। उल्टा गांव के लोग मजाक उड़ाने लगे। कई लोगों ने उसके माता-पिता तक से कह दिया कि बेटा समय बर्बाद कर रहा है।
टर्निंग पॉइंट साबित हुई मेवाड़ी
बाबूलाल ने हार मानने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत खोजी, जो थी मेवाड़ी। उसने मेवाड़ी में कॉमेडी, ग्रामीण जीवन, धार्मिक स्थलों और पहाड़ी इलाकों की अनदेखी खूबसूरत जगहों पर वीडियो बनाना शुरू किया। यही फैसला उसकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। लोगों ने भाषा, सहज अंदाज और मिट्टी से जुड़ी प्रस्तुति को खूब पसंद किया। देखते ही देखते वीडियो वायरल होने लगे और फॉलोअर्स तेजी से बढ़ गए।
आस्था ने दिया संबल
सोशल मीडिया की लोकप्रियता के साथ बाबूलाल ने अपनी पहचान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखी। उसने धार्मिक पर्यटन और आस्था को भी कंटेंट का हिस्सा बनाया। पिछले साल उदयपुर से खाटूश्यामजी तक पैदल यात्रा की, जिससे एक लाख फॉलोअर्स पूरे हुए। इसके बाद एक और बड़ा सपना देखा, उदयपुर से केदारनाथ तक पैदल यात्रा कर देबारी घाटावाला माता की ध्वजा बाबा केदारनाथ धाम में फहराने का।
पदयात्राओं ने बदल दी किस्मत
17 मई को दोस्त राजू के साथ बाबूलाल ने पदयात्रा शुरू की। 35 दिन तक बारिश, कठिन रास्तों और पहाड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए 20 जून को केदारनाथ पहुंचे और वहां ध्वजा फहराई। 25 जून को उदयपुर लौटने पर लोगों ने दिल खोलकर स्वागत किया। बाबूलाल आज सोशल मीडिया पर केवल एक इंफ्लुएंसर नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और युवा संकल्प का चेहरा बन चुका है।
मेहनत, धैर्य, काम पर विश्वास करें
अगर आप सोशल मीडिया या किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो लोगों की नकारात्मक बातों से मत रुकिए। जो लोग आज आपका मजाक उड़ाते हैं, वे ही कल आपकी सफलता की मिसाल देंगे। मेहनत, धैर्य और अपने काम पर विश्वास बनाए रखिए। मंजिल देर से मिलेगी, लेकिन जरूर मिलेगी।