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उदयपुर. हज यात्रा को किफायती, सुविधाजनक बनाने के लिए उदयपुर जिला हज कमेटी ने केंद्र सरकार और हज कमेटी ऑफ इंडिया को सुझाव प्रस्ताव भेजा है। इनमें उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट को हज एम्बारकेशन पॉइंट घोषित कर यहां से सीधे हज उड़ान शुरू करने की मांग की गई। कमेटी के मुताबिक अभी उदयपुर संभाग के हजारों हाजियों को जयपुर और अहमदाबाद तक जाने के लिए अतिरिक्त परेशानी और खर्च करना पड़ रहा है। फिलहाल हज यात्रा महंगी होने का बड़ा कारण हवाई किराया है। इसे कम करने के लिए हज उड़ानों के संचालन में ओपन स्काई पॉलिसी लागू करते हुए वैश्विक स्तर पर टेंडर आमंत्रित किए जाएं, ताकि अधिक एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़े और किराए में कमी आए। क्षेत्रीय एम्बारकेशन पॉइंट्स से भी समान किराया तय किया जाए।
कमेटी ने भी की मांगें
- हवाई टिकट और सऊदी अरब में मिलने वाली सेवाओं पर लगने वाले जीएसटी को समाप्त किया जाए।
- भारत और सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क वार्ता से कम करवाया जाए।
- मक्का-मदीना में हाजियों के लिए होटल व परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी किया जाए। अग्रिम बुकिंग से अंतिम समय में होने वाली महंगी दरों से बचा जा सकता है। सऊदी सरकार के साथ रियायती दरों पर सामूहिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं के लिए अग्रिम अनुबंध किए जाए।
- भारतीय रिजर्व बैंक के जरिये ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे हाजियों को बिना किसी अतिरिक्त कमीशन या बिचौलियों के उचित दर पर सऊदी रियाल उपलब्ध हो सकें।
- कमेटी ने वर्ष 2026 में शुरू किए शॉर्ट हज पैकेज की ऊंची लागत को कम किया जाए।
- निजी हज टूर ऑपरेटर की ओर से मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए प्राइस कैप तय करने की मांग की।
उदयपुर जिला हज कमेटी की ओर से केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इनमें से कुछ लागू होता है तो हाजियों को फायदा होगा। हज-2027 के लिए 20 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
मोहम्मद अय्यूब डायर, संयोजक एवं हज ट्रेनर, जिला हज कमेटी
क्या है हज यात्रा?
हज यात्रा इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो हर वर्ष सऊदी अरब के पवित्र शहर मस्जिद अल-हरम और उसके आसपास के पवित्र स्थलों पर की जाती है। यह इस्लाम के पाँच प्रमुख स्तंभों में शामिल है। प्रत्येक सक्षम मुस्लिम के लिए जीवन में कम से कम एक बार हज करना धार्मिक कर्तव्य माना गया है। हज इस्लामी कैलेंडर के अंतिम महीने जिलहिज्जा में निर्धारित दिनों पर संपन्न होता है। श्रद्धालु इस दौरान तवाफ, सई, अराफात में वुकूफ, मुज़दलिफा में प्रवास और शैतान को प्रतीकात्मक कंकरी मारने सहित कई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। यह यात्रा समानता, त्याग, धैर्य और आध्यात्मिक एकता का संदेश देती है।
Updated on:
10 Jul 2026 06:23 pm
Published on:
10 Jul 2026 06:23 pm
